प्रधानमंत्री कार्यालय से सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को आए एक फोन से हड़कंप मच गया। ये कॉल उन्हें एक बार नहीं बल्कि कई बार आया।
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trivendra singh rawat
किसी ने खुद को पीएमओ में तैनात एक अधिकारी बताकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को लगातार फोन किए। फोन करने वाले ने कुछ सिफारिशी काम भी बताए। मुख्यमंत्री को शक हुआ तो उन्होंने पीएमओ में पड़ताल करवाई। पता चला कि उस नाम का कोई भी व्यक्ति पीएमओ में है ही नहीं। मुख्यमंत्री ने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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हाल ही में मुख्यमंत्री दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करने गए थे। उसी दौरान उमेश कुमार नाम के एक व्यक्ति ने उनके निजी मोबाइल पर फोन किया। फोन उसने पर खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात अधिकारी बताया। इस पर त्रिवेंद्र रावत ने उनसे फोन करने की वजह पूछी, तो उसने विधानसभा में बनाई जाने वाली समिति में एक परिचित को रखने की सिफारिश की।
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साइबर क्राइम
- फोटो : self
इस पर मुख्यमंत्री ने बिना किसी सकारात्मक आश्वासन दिए कहा कि समिति बनाना स्पीकर के कार्य क्षेत्र का मामला है। इसके बाद व्यस्तता का हवाला देते हुए सीएम ने फोन काट दिया। इसके अगले दिन दोबारा इसी व्यक्ति ने मुख्यमंत्री को फोन किया और एक अधिकारी की तैनाती की सिफारिश करने लगा।
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uttarakhand secretariat
अलग-अलग वक्त पर तीन बार फोन आने पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री कार्यालय में संबंधित व्यक्ति के नाम और फोन नंबर से जानकारी करवाई तो मालूम चला कि उमेश कुमार नाम का कोई अफसर वहां तैनात ही नहीं है। मुख्यमंत्री ने तत्काल अपने कार्यालय में तैनात अधिकारियों को संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री को फर्जी फोन की बात से शासन में खलबली मच गई। आनन-फानन में संबंधित व्यक्ति के मोबाइल नंबर की पड़ताल शुरू की गई है।
एक व्यक्ति मुझे पीएमओ के नाम से कई बार फोन किया था। जब जानकारी कराई तो उस नाम का कोई भी व्यक्ति पीएमओ में तैनात नहीं मिला। इस पर मैंने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री (उत्तराखंड)