फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जाने-अंजाने आपकी आंखों को हो सकता है ये खतरा, ऐसे रखें ख्याल

Tue, 20 Sep 2016 08:00 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
1 of 8
ase
मौसम में बदलाव के साथ आई फ्लू और आंखों में संक्रमण संबंधित बीमारियों में वृद्धि होने लगी है। चिकित्सकों के अनुसार यह मौसम फ्लू के लिए सबसे ज्यादा अनुकूल होता है। नमी ज्यादा होने के चलते फ्लू के वायरल तेजी से मूवमेंट करते हैं। हर साल इस मौसम में बड़ी संख्या में आई फ्लू समेत अन्य फ्लू के मरीज सामने आते हैं।
विज्ञापन

2 of 8
s
आई फ्लू को सामान्य बोलचाल की भाषा में आंख आना भी कहा जाता है। इस बीमारी में आंखें लाल हो जाती हैं और कीचड़ जमने लगता है। आंखों में मिचमिचाहट और पानी निकलने की समस्या भी होती है। यह बहुत तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।
 
विज्ञापन

3 of 8
d
नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में वातावरण में नमी ज्यादा होती है। इसके चलते वायरस तेजी से पनपते और फैलते हैं। हाथ मिलाने, संक्रमित जगहों को छूने या मौसम के प्रभाव से हाथों में वायरस आ जाते हैं।
 

4 of 8
- फोटो : इंस्टाग्राम
जैसे ही संक्रमित हाथों को आंखों पर लगाया जाता है, वायरस तुरंत आंखों में चला जाता है। इसके बाद आंखों में संक्रमण और एलर्जी की शिकायत होती है। सावधानी ना बरतने और उपचार नहीं  करने पर यह नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। इससे कार्निया को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। 
 
विज्ञापन

5 of 8
आई फ्लू के लक्षण: आंखों का लाल होना, आंखों में सूजन, चिपचिप और कीचड़ जमना, जलन और चुभन, आंखों में खुजली, धुंधला दिखाई देना।
 
विज्ञापन

6 of 8
Water Tap
ऐसे करें बचाव: संक्रमित चीजों को छूने से बचें, गंदे हाथ आंखों पर ना लगाएं, आंखों को ठंडे पानी से धोएं, ज्यादा उमस और नमी से बचें, साफ-सफाई पर ध्यान दें, रोगी से हाथ मिलाने से बचें, रोगी के रुमाल-कपड़े इस्तेमाल ना करें।
 
विज्ञापन

7 of 8
eyes - फोटो : getty images
आई फ्लू हो तो क्या करें: तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से मिलें, काला चश्मा लगाकर रखें, आंखों को रगड़ें नहीं, अन्य लोगों से हाथ ना मिलाएं, आंखों पर हाथ ना लगाएं, आंखों को बार-बार साफ करते रहें।
 
विज्ञापन

8 of 8
मौसम में बदलाव और नमी के चलते आई फ्लू का खतरा ज्यादा रहता है। इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता रहती है।
- डॉ. सुशील ओझा, विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें