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'द वॉयस इंडिया' बन चमका उत्तराखंड का सितारा, देखीं ये तस्वीरें

Tue, 01 Sep 2015 11:18 AM IST
ब्यरो/अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के लाल पवनदीप ने राजन की संगीत के प्रति दीवानगी और जुनून ने उन्हें द वॉयस ऑफ इंडिया बना दिया है। तस्वीरों में देखिए पवनदीप का सफर...
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'द वॉयस इंडिया' बन चमका उत्तराखंड का स‌ितारा, देखीं ये तस्वीरें

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पवन को गायन प्रतिभा विरासत में मिली है। क्योंकि उनके पिता सुरेश राजन स्वयं लोक गायक हैं तथा उनकी नानी कबूतरी देवी कुमाऊं की प्रसिद्ध लोक गायिका हैं।
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पवनदीप को अपनी मातृ बोली से भी उतना ही लगाव है जितना गीत-संगीत से। कार्यक्रम के दौरान जब उषा उत्थुप ने उन्हें कुमाऊंनी में गीत सुनाने का अनुरोध किया तो उन्होंने ‘प्यारी जन्मभूमि मेरो पहाड़, गंगा जमुना यां छौं बदरी केदार’ गाकर सबको निहाल कर दिया।

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अक्तूबर-2000 में खेतीखान दीप महोत्सव में महज पांच साल की उम्र में तबला वादन से शुरू हुआ चंपावत के समीपवर्ती चौकी ग्राम पंचायत निवासी पवनदीप का द वॉयस इंडिया तक का सफर बेहद रूहानी रहा।
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पवन अक्तूबर 1998 में जब महज दो साल के थे तब चंपावत में आयोजित कुमाऊं महोत्सव में उन्होंने पहली बार तबला वादन कर खूब वाहवाही लूटी थी। तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त जयति चंद्रा और विधायक केसी पुनेठा ने उनकी पीठ थपथपाई थी।
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जब पवनदीप एंड टीवी के ग्रैंड फ‌िनाले पर परफॉर्मेंस दे रहे थे तब उनके घर के पास जश्न सा माहौल था। सभी स्क्रीन लगाकर घर के बाहर फ‌िनाले देखने के ल‌िए बैठे थे।

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उधर बेटा स्टेज पर परफॉर्म कर रहा था और इधर मां सांसें रोके ईश्वर से जीत की दुआएं मांग रही थीं।

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और उनकी दुआएं कुबूल भी हो गईं। जैसे ही बेटे के द वॉयस इंड‌िया बनने की घोषणा हुई पवनदीप की मां की आंखों से आंसू छलक पड़े। पर ये खुशी के आंसू थे, बेटे पर गर्व के आंसू।

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लेक‌िन अगले ही पल जश्न का दौर शुरू हुआ तो कोई पीछे नहीं रहा।

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अमर उजाला के संग पवनदीप के संगीत का सफर। पवनदीप के परिजनों ने उनकी इस उपलब्धि पर अमर उजाला का भी शुक्रिया अदा किया है। वहीं, अमर उजाला ने भी पवनदीप के हल्द्वानी आगमन पर उन्हें सम्मानित करने का फैसला लिया है।
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पवनदीप के माता-पिता मूल रूप से पिथौरागढ़ जिले के सल्लाचिंगरी गांव के निवासी हैं। बीते दो दशक से वे चंपावत में रह रहे हैं।
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