उत्तराखंड के कोटद्वार-पुलिंडा मार्ग पर हाथियों के जमघट से जहां पूरे दिन सड़क जाम रही, वहीं सुरक्षा की दृष्टि से वन विभाग ने इस रूट पर चलने वाले यात्री वाहनों का संचालन बंद कर दिया। यात्री वाहनों को दुगड्डा-ऐता-चरेख मार्ग से चलने की सलाह दी गई है।
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elephant blocked road in kotdwar
घाड़ क्षेत्र के मुख्य मार्ग पर ट्रैफिक बंद करने से इस इलाके के दर्जनभर गांवों के लोग परेशान रहे। जनप्रतिनिधियों ने हाथी के कारण सड़क बंद करने का पुरजोर विरोध किया है। कहा कि हाथियों के आवागमन के दौरान वन विभाग को विशेष व्यवस्था करनी चाहिए।
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elephant blocked road in kotdwar
बुधवार शाम से कोटद्वार-पुलिंडा मार्ग पर हाथी झुंडों ने डेरा जमा रखा। बृहस्पतिवार पूरे दिन हाथियों के सड़क पर रहने के कारण वन विभाग ने इस रूट पर एक भी वाहन नहीं चलने दिया। इससे घाड़ क्षेत्र के करीब 30 गांवों के लोगों को परेशान होना पड़ा। वन विभाग अधिकारियों की मानें तो इस रूट पर तीन दिनों से अचानक हाथियों की चहलकदमी बढ़ गई है।
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हाथियों को सड़क से हटाने के लिए की जा रही हवाई फायरिंग भी बेकार साबित हो रही है। हाथी झुंड सड़क से हटने को तैयार नहीं हैं। फायरिंग के दौरान कई बार हाथी वन कर्मियों के पीछे भी दौड़ा है। इसके कई मायने लगाए जा रहे हैं।
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elephant
जानकारों का कहना है कि या तो झुंड का कोई हाथी घायल है या फिर हथिनी ने सड़क के किनारे बच्चा जना है। दोनों ही स्थितियों में हाथी सड़क पर डटे रहते हैं।
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हाथी
ग्रामीणों का कहना है कि पुलिंडा मार्ग पर रविवार और छुट्टी वाले दिन शराबियों का जमघट लगा रहता है, जो शराब और बीयर की खाली बोतलें सड़क किनारे या जंगल में फेंक देते हैं, ऐसे में कांच की बोतल से हाथियों के घायल होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।
रेंज अधिकारी एसपी कंडवाल का कहना है कि सड़क पर अंधे मोड़ होने के कारण कर्मचारियों को हाथियों के सामने भेजने में खतरा बना है। ट्रैफिक को दुगड्डा होते हुए निकाला गया।