बड़े नोटों पर प्रतिबंध लगाकर मोदी सरकार ने समानांतर अर्थव्यवस्था पर करारा वार करने का दावा जरूर किया है, मगर इससे समाज के हर वर्ग को भारी मुसीबत झेलना तय है।
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हर तरफ सिर्फ नोट ही नोट की चर्चा
जानकारों की मानें तो यह फैसला कर संग्रह को कई गुना बढ़ा देगा, जिससे देश का विकास होना तय है। मगर नौकरीपेशा लोगों से लेकर व्यवसायी, घरेलू महिलाएं आदि सभी को दिक्कत भी होगी।
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income tax
- फोटो : income tax
पहले ही आयकर विभाग समेत अन्य एजेंसियों के राडार पर रहने वाले रियल इस्टेट सेक्टर को इस फैसले की भारी मार झेलनी पड़ेगी। सख्ती के चलते मकान, फ्लैट या प्लॉट लेने में कालेधन का इस्तेमाल काफी कम हो चुका है, मगर अब पूरी तरह नकद लेनदेन बंद हो जाएगा। इससे बिल्डरों का शामत आनी तय है।
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डेमो
- फोटो : डेमो
अभी तक नकद लेनदेन के लिए पहचाने जाने वाले ज्लैवरी और बुलियन कारोबार पर भी इसका खासा असर पड़ेगा। दरअसल छोटे से लेकर बड़े खरीदार शादी-समारोह या अन्य मौकों पर अपनी छोटी-छोटी बचत से सोना-चांदी खरीदते हैं। अब ऐसा नहीं हो पाएगा। वहीं सराफा कारोबारी भी फिलहाल पुराने नोटों पर बिक्री करने के मूड में नहीं है।
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rupee
आयकर विभाग को इस व्यवस्था से बड़ा फायदा होगा। दरअसल बचत खाते में दस लाख रुपए के नकद लेनदेन पर आयकर विभाग संबंधित खाताधारक को नोटिस जारी करके इस रकम का श्रोत पूछता है। यदि विभाग असंतुष्ट होता है तो उसे टैक्स देना पड़ता है। नई व्यवस्था में लोगों को पांच सौ और हजार के नोट खाते में जमा करने के लिए कहा गया है। ऐसे में पैन नंबर के आधार पर आयकर विभाग को नकद लेनदेन संबंधी सूचनाएं तादाद में मिलेंगी। ऐसे में विभाग को भारी राजस्व की प्राप्ति होनी तय है। वहीं आम और खास सभी प्रकार के खाताधारकों को दिक्कत होना स्वाभाविक है।
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atm card
मोदी सरकार का ताजा फैसला उन लाखों-करोड़ों लोगों को भी मुसीबत में डाल सकता है, जो किसी इमरजेंसी के लिए घर में लाख-दो लाख रुपए रखते हैं। ये पैसा अक्सर किसी बीमारी या आकस्मिक दिक्कत से निपटने या किसी रिश्तेदार-पड़ोसी की मदद के लिए लगभग हर घर में संभालकर रखा जाता है। मगर अब उन्हें यह राशि बैंक खातों में जमा करनी होगी। नियमानुसार बैंक के एटीएम से एक दिन में बीस से पच्चीस हजार रुपए तक निकाला जा सकता है। इस राशि से किसी बड़े खर्च की आवश्यकता को पूरा नहीं किया जा सकता है। वहीं घरेलू महिलाओं को अपनी छोटी-छोटी बचत का पैसा भी सार्वजनिक करना होगा।
अभी एक दिक्कत और है बड़े नोटों को बैंकों में जमा करने को लेकर। पहले तो बैंक अभी इस इंतजाम के लिए तैयार होंगे, ऐसा नजर नहीं आता है। यदि दो दिन बाद नोट जमा करने की कार्रवाई शुरू होती भी है तो उस स्थिति में सैकड़ों लोगों की लाइन बैंकों के बाहर होगी। ऐसे में नौकरीपेशा लोगों के अलावा स्टूडेंट समेत अन्य वर्ग के सामने तमाम दुश्वारियां होंगी। इसके अलावा जनधन जैसी योजना आने के बावजूद अभी भी बड़ा तबका ऐसा है, जिसका बैंक खाता नहीं है। वह अपने पास मौजूद बड़े नोटों को कहां लेकर जाएगा।