अपने पितरों के श्राद्घ में अगर आपने इन छोटी-छोटी बातों को ध्यान नहीं रखा तो आपके किए कराए पर पानी फिर जाएगा।
विज्ञापन
2 of 7
shradh
ब्राह्मण को भोजन परोसते समय दोनों हाथों का इस्तेमाल करें। मान्यता है कि एक हाथ से पकड़े हुए अन्न पात्र से परोसा हुआ भोजन राक्षस छीन लेते हैं।
विज्ञापन
3 of 7
shradh
श्राद्ध में चांदी के बर्तनों का प्रयोग करने से राक्षसों का नाश होता है। अतः अर्घ्य, पिण्ड और भोजन चांदी के बर्तन में ही निकालें।
4 of 7
- फोटो : अमर उजाला
श्राद्ध कर्म में गाय का घी, दूध या दही जरूर शामिल करना चाहिए। श्राद्ध के समय खाली जमीन पर नहीं बैठना चाहिए। बैठने के लिए आसन का प्रयोग करना चाहिए।
विज्ञापन
5 of 7
shradh
श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन कराते समय उनसे बात नहीं करनी चाहिए। माना जाता है कि भोजन करते वक्त अगर ब्राह्मण मौन रहता है तो उसके रूप में पितर भोजन करते हैं। श्राद्ध के समय यदि कोई भिखारी आए तो उसे वापस न करें और घर पर बने सभी व्यंजन खिलाएं।
विज्ञापन
6 of 7
कौए
- फोटो : अमर उजाला
श्राद्ध में तैयार भोजन में से गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चींटी के लिए जरूर पांच भाग निकालें। माना जाता है कि इनके जरिए पितरों को भोजन मिलता है। केले के पत्ते पर भोजन न निकालें। सोने, चांदी, कांसे, तांबे के पात्र उत्तम माने जाते हैं।
श्राद्ध में कुत्ते और कौए का भोजना उन्हें ही खिलाएं। देवता और चींटी का भोजन केवल गाय को ही खिलाएं। श्राद्ध में ब्राह्मणों विदा करने दरवाजे तक जरूर जाएं। मान्यता है कि ब्राह्मणों के साथ-साथ पितर लोग भी बराबर चलते हैं।