आपको 2013 में केदारनाथ धाम में मची तबाही याद होगी। केदारनाथ धाम में चौराबाड़ी ताल से आए सैलाब ने सबकुछ बर्बाद कर दिया था। अब चार साल बाद उत्तराखंड के पहाड़ पर तबाही मचाने के लिए एक और ताल तैयार हो गया है।
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kedarnath disaster
असी गंगा नदी के उद्गम स्थल डोडीताल कभी भी तबाही ला सकता है। 2012 में आई आपदा के दौरान डोडीताल मलबे और गाद से भर गया था, जिसे हटाने की कोई कवायद नहीं की गई। अब ये ताल कभी भी बड़ी बर्बादी मचा सकता है।
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बादल फटने के बाद का नजारा
- फोटो : AmarUjala file photos
अगस्त 2012 में डोडीताल दरबा टॉप वाले हिस्से में बादल फटने पर असी गंगा में आए उफान ने बड़ी तबाही मचाई थी। असी गंगा घाटी से लेकर उत्तरकाशी तक पांच से अधिक पुल बह गए थे और संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा था।
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flood in river
- फोटो : amar ujala
डोडीताल का 30 मीटर से अधिक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के साथ ही उसमें भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया है। ताल में कई बड़े पेड़ भी गिरे हैं। ऐसे में अगर दोबारा बादल फटने की घटना हुई तो बड़ी तबाही आ सकती है।
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उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण बाढ़
- फोटो : amar ujala
समुद्रतल 3024 मीटर की ऊंचाई पर स्थित डोडीताल उत्तरकाशी से 40 किलोमीटर दूर है। इसमें से 22 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। यह खूबसूरत पर्यटक स्थल चारों ओर से पहाड़ व घने जंगल से घिरा हुआ है।
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ganesha
- फोटो : amarujala
मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसलिए डोडीताल झील को गणेश झील भी कहते हैं। यहां भगवान गणेश व मां अन्नपूर्णा का मंदिर भी है।
वन विभाग के डीएफओ संदीप कुमार के मुताबिक अगस्त 2012 की बाढ़ में डोडीताल क्षेत्र में वन संपदा व ताल को भारी नुकसान पहुंचा था। करीब 110 करोड़ की क्षति का आकलन कर रिपोर्ट शासन को दी गई है, लेकिन स्वीकृति नहीं मिली। अब दोबारा रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। उत्तरकाशी के जिलाधिकारी आशीष श्रीवास्तव के मुताबिक डोडीताल से संबंधित रिपोर्ट मांगी जा रही है। झील में कितनी गाद व मलबा है, इसका अध्ययन किया जाएगा। गाद हटाने के लिए जो भी संभव होगी, वह कार्रवाई की जाएगी।