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दिवाली 2019: ये हैं लक्ष्मी पूजन के तीन शुभ मुहूर्त, इन उपायों से मिलेगी सुख समृद्धि और तरक्की

Sun, 27 Oct 2019 09:42 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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- फोटो : अमर उजाला
इस बार दीपावली सूर्य के दिन रविवार, पद्मांक्ष योग और विशिष्ट चित्रा नक्षत्र में पड़ रही हैं। दीपावली पूजन के लिए तीन शुभ मुहूर्त में पूजा करना शुभ होगा। इस बार दीपावली पर रविवार को विशेष पूजन काल करीब 1 घंटा 32 मिनट का होगा। 
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- फोटो : अमर उजाला
शाम 6.40 बजे से रात्रि 8.30 बजे तक समस्त गृहस्थों के लिए सर्वाधसिद्धि योग है। इस समय लक्ष्मी का पूजन किया जाए तो सभी प्रकार के सुखदायी फल प्राप्त होंगे। इस समय को ज्योतिष में प्रदोषकाल कहा गया है। इस समय प्रदोषकाल में वृष लग्र, स्थिर लग्र, चित्रा नक्षत्र, तुला राशि के चंद्र एवं अमृत की चौघड़ियां मिल जाएंगी। यह सभी शुभ मुहूर्त बनाते हैं। 
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- फोटो : social media
दूसरा योग रात 8.15 बजे से रात 11 बजे तक रहेगा। इस काल को निशिथ काल का योग कहा गया है। इस काल में श्रीसूक्त का पाठ करना चाहिए। कनकधारा स्तोत्र का पाठ, लक्ष्मी सहस्त्रनाम का पाठ करते हुए महालक्ष्मी की चांदी की मूर्ति पर अभिषेक करना सर्वोत्तम है। 

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- फोटो : अमर उजाला
तीसरा और विशेष योग महानिशिथ काल का है। इस योग की पूजा रात्रि 10.50 से लेकर आधी रात के बाद 1.28 बजे तक की जाएगी। पूजा का यह काल खास तौर से तंत्रसाधकों के लिए है। अघोर सम्प्रदाय के लोग भी इसी काल का प्रयोग अपनी सिद्धियों के लिए करते है। 
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- फोटो : अमर उजाला
मार्तण्ड रत्न एवं ज्योतिष अनुसंधान केंद्र  के डॉ. पं. सुनील पैन्यूली ने बताया कि दिवाली के दिन पूजा स्थल पर तिल के तेल का चौमुखा दीपक जलाना चाहिए। लाल वस्त्र में पांच गोमती चक्र, 11 कौड़ियां, पांच हल्दी की गांठ, पांच कमल गट्टे और एक चांदी का सिक्का या साधारण सिक्का रखकर उनका पूजन करें। इसके बाद ऊं ह्रीं श्रीं: नम: मंत्र की पांच से सात माला का जाप करें। 
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श्री सूक्त के 11/21 पाठ करके सिंह लग्न रात्रि 1:14 बजे से रात 3:35 बजे तक उक्त सभी वस्तुओं को धन रखने के स्थान पर स्थापित करने से निश्चित ही बरकत आएगी। आदिगुरू शंकराचार्य ने श्रीयंत्र में मां लक्ष्मी का प्राण होना माना है। दिवाली की महानिशा में सिद्ध श्रीयंत्र की नित्य प्रति पूजन व दर्शन करने से धन सौभाग्य, पुत्र और यश की प्राप्ति होती है। 
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तांबे के श्रीयंत्र स्थापना और पूजन करने से साधक का तेज बढ़ता है। चांदी के यंत्र से साधक का कल्याण होता है। सोने से निर्मित यंत्र की पूजा व साधना करने से शत्रु पराजित होता है। स्फटिक निर्मित यंत्र से चारों दिशाओं में उन्नति होती है। पंचधातु के यंत्र से साधक धन से भरपूर होता है। अष्टधातु के यंत्र से साधक के सभी मनोरथ पूरे होते  हैं। सोना, चांदी और तांबा के मेल से बना श्रीयंत्र सर्वाधित सौभाग्य की वृद्धि करता है।
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