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कुदरत का कहर: आपदा से गांव पानी में डूबा और आंखें आंसुओं के सैलाब में, काली रात की आपबीती सुना सहम उठे लोग

Sun, 11 Sep 2022 11:55 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, धारचूला (पिथौरागढ़)
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प्रभावित क्षेत्र - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के धारचूला में आई आपदा में अपना सब कुछ गंवा देने वाले परिवार सदमे में हैं। आपदा ने एक पल में ही उनका आशियाना छीन लिया। मेहनत से पाई-पाई जमा कर बनाए गए घरों के साथ ही लाखों का सामान भी जलमग्न हो गया। बच्चों के भविष्य के लिए जमा पूंजी भी मलबे और पानी में समा गई। अब उनके पास है आंसुओं के सिवाय कुछ नहीं बचा है। 

खोतिला निवासी 50 वर्षीय मंजू देवी ने कहा कि वह परिवार के अन्य सदस्यों के साथ घर में सो रही थीं। इसी दौरान अचानक दरवाजे पर खटखटाने की आवाज और हल्ला सुनाई दिया। किसी तरह हिम्मत जुटाकर दरवाजा खोला तो विनोद और यूनिस ने बताया कि भारी बारिश के चलते और नेपाल की तरफ से आए मलबे के कारण काली नदी का जल स्तर बढ़ गया है।

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समय रहते नहीं निकले तो हादसा हो सकता है।अभी निकलना पड़ेगा। बदहवास हालत में  105 वर्षीय सास लक्ष्मी देवी, बेटे और तीन भांजियों को जगाकर युवकों के साथ भीगते हुए सुरक्षित स्थान पर पहुंचे।

कमरों और गांव के रास्तों में पानी भर जाने से आधा शरीर पानी के अंदर था। भीषण हालात में सपनों के घरों को छोड़ना पड़ा। घर में रखा आठ तोला सोना, 10 हजार की नकदी भी वहीं छोड़ दी। अब तो घर मलबे और पानी में दबा है। उन्होंने कहा कि सोना मिल जाए तो भांजियों और बेटी के काम आ जाएगा। 
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बादल फटने के बाद ऐसा है भारत और नेपाल के बीच का हाल - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि शुक्रवार की रात नेपाल क्षेत्र में बादल फटने से काली नदी के पानी से खोतिला गांव जलमग्न हो गया था। इस आपदा में लोगों ने सुरक्षित स्थानों पर भागकर जान बचाई। एक महिला घर के भीतर ही पानी और मलबे में डूबने से जिंदगी की जंग हार गई। 
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सीएम से दुख जताती महिला - फोटो : अमर उजाला
उस मंजर को याद कर गांव के लोग सहम जाते हैं। ग्रामीणों ने कहा  कि शुक्रवार की रात काली नदी ने ऐसा भयंकर रूप दिखाया कि तल्ला खोतिला गांव जलमग्न हो गया। उस समय सभी लोग नींद में थे। जैसे ही मकानों के भीतर पानी भरने लगा 60 परिवारों के 150 से अधिक लोगों ने सुरक्षित स्थान की ओर दौड़ लगाई। ये परिवार अब घर बार छोड़कर धारचूला के स्टेडियम में रहने के लिए मजबूर हैं। 

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आपदा में घर खोने के बाद स्टेडियम में रह रहे ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
लोगों ने बताया कि घर से निकलते वक्त कोई भी अपने साथ एक तिनका भी नहीं ला पाया। जो जिस हाल में था, वह वैसे ही सुरक्षित स्थान की तरफ भागा। महिलाओं ने बच्चों तो पुरुषों ने बुजुर्गों को सहारा देकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। आपदा शिविर में कोई अपने बच्चों को गले लगाकर रो रहा था तो कोई अपने भाई बंधुओं को। जिस तरह से उन्होंने गांव को जलमग्न होते देखा है उन्हें यकीन नहीं हो रहा है कि अब वे दोबारा उन घरों में रह सकेंगे। 
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प्रभावित लोग - फोटो : अमर उजाला
आपदा प्रभावित एक ही दुआ कर रहे हैं कि घर में उनकी जमा पूंजी और सामान सुरक्षित हो ताकि हालात सामान्य हो जाएं और घर में रखी जमा पूंजी और जरूरी सामान को निकाल सकें। आपदा प्रभावितों के चेहरे पर डर साफ देखा जा सकता है। दशकों से जिस आशियाने में पले-बढ़े, खेले- कूदे आज वह नदी में समाने वाला है। सभी के चेहरे पर भविष्य की चिंता झलक रही थी।
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पिथौरागढ़ - फोटो : अमर उजाला
आपदा राहत शिविर में रह रहे कई परिवारों के पास बदलने के लिए कपड़े तक नहीं है। हालांकि प्रशासन ने उन्हें जरूरी सामान मुहैया तो कराया है लेकिन दर्द उन्हें इस बात का है कि आखिर प्रशासन से कब तक उन्हें सहारा मिलता रहेगा। 
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