उत्तराखंड के धारचूला में आई आपदा में अपना सब कुछ गंवा देने वाले परिवार सदमे में हैं। आपदा ने एक पल में ही उनका आशियाना छीन लिया। मेहनत से पाई-पाई जमा कर बनाए गए घरों के साथ ही लाखों का सामान भी जलमग्न हो गया। बच्चों के भविष्य के लिए जमा पूंजी भी मलबे और पानी में समा गई। अब उनके पास है आंसुओं के सिवाय कुछ नहीं बचा है।
खोतिला निवासी 50 वर्षीय मंजू देवी ने कहा कि वह परिवार के अन्य सदस्यों के साथ घर में सो रही थीं। इसी दौरान अचानक दरवाजे पर खटखटाने की आवाज और हल्ला सुनाई दिया। किसी तरह हिम्मत जुटाकर दरवाजा खोला तो विनोद और यूनिस ने बताया कि भारी बारिश के चलते और नेपाल की तरफ से आए मलबे के कारण काली नदी का जल स्तर बढ़ गया है।
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समय रहते नहीं निकले तो हादसा हो सकता है।अभी निकलना पड़ेगा। बदहवास हालत में 105 वर्षीय सास लक्ष्मी देवी, बेटे और तीन भांजियों को जगाकर युवकों के साथ भीगते हुए सुरक्षित स्थान पर पहुंचे।
कमरों और गांव के रास्तों में पानी भर जाने से आधा शरीर पानी के अंदर था। भीषण हालात में सपनों के घरों को छोड़ना पड़ा। घर में रखा आठ तोला सोना, 10 हजार की नकदी भी वहीं छोड़ दी। अब तो घर मलबे और पानी में दबा है। उन्होंने कहा कि सोना मिल जाए तो भांजियों और बेटी के काम आ जाएगा।