करोड़ों साल पुराने इस अनोखे शिवलिंग में देखने से कुछ ऐसा नजारा सामने आता है कि सारे पाप कट जाते हैं।
विज्ञापन
2 of 6
shivling
देहरादून जिले के लाखामंडल में स्थित इस शिवलिंग में जलाभिषेक करने से जल चढ़ाने वाले भक्त की तस्वीर दिखने लगती है। मान्यता है कि ऐसा होने से जलाभिषेक करने वाले के सारे पाप कट जाते हैं।
विज्ञापन
3 of 6
lakhamandal
यह शिवलिंग लाखामंडल मंदिर के परिसर में है जो कि देहरादून से 128 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यमुना नदी की तट पर है। यह जगह गुफाओं और भगवान शिव के मंदिर के प्राचीन अवशेषों से घिरा हुआ है। माना जाता है कि इस मंदिर में प्रार्थना करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल जाती है। यहां पर खुदाई करते वक्त विभिन्न आकार के और विभिन्न ऐतिहासिक काल के शिवलिंग मिले हैं।
4 of 6
lakhamandal
स्थानीय लोगों की मान्यता है कि महाभारत के समय में पांडवों ने अपने वनवास का कुछ समय यहां बिताया था। पाडंवों ने यहां छिपने के लिए लाख का महल 'लाक्षागृह' बनाया था। यहां से बचकर भागने के लिए पांडवों ने सुरंग बनाई थी। कहा जाता है कि यह सुरंग हस्तिनापुर तक पहुंचती है। इसे सुरक्षा कारणों को देखते हुए सुरंग अब बंद करवा दी गई है।
विज्ञापन
5 of 6
lakhamandal
यहां शिव की लाखों मूर्तियां मिलती हैं। दो फुट की खुदाई करने से ही यहां हजारों साल पुरानी कीमती मूर्तियां निकल आती हैं। इसी कारण इस स्थान को आर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की निगरानी में रखा गया है।
इसी कारण लाखा मंडल में नए निर्माण पर रोक लगाया गया है। परिस्थितियों के मुताबिक कभी भी इस जगह को खाली करवाया जा सकता है।
यहां कुछ दूर पर लाक्षागृह गुफा है। जहां शेषनाग के फन के नीचे प्राकृतिक शिवलिंग के ऊपर टपकता पानी यहां की खासियत है। देहरादून से 125 किमी दूर यमुना किनारे मौजूद लाखामंडल में हल्की खुदाई करने पर कदम-कदम पर शिव लिंग निकलते हैं।