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लिटरेचर फेस्टिवल: रस्किन बांड ने छात्रों को बताया सफल लेखक बनने का राज, तस्वीरें...

Sat, 12 Oct 2019 09:36 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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रस्किन बांड - फोटो : अमर उजाला
अच्छा लेखक बनने में लंबा समय लगता है। लेखन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है। आपको लगन के साथ मेहनत करनी होती है। शुक्रवार से दून इंटरनेशनल रीवरसाइड कैंपस में शुरू हुए देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल में रस्किन बांड ने यह बात कही। वे खुली किताब सत्र में विभिन्न स्कूली बच्चों से रूबरू हुए।
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रस्किन बांड - फोटो : अमर उजाला
खुली किताब सत्र में पद्मभूषण रस्किन बांड ने स्कूली बच्चों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ  साहित्य और लेखन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए बल्कि बच्चों के सवालों के जवाब भी दिए। दून इंटरनेशनल स्कूल रिवरसाइड कैंपस की लीसा अग्रवाल, दून इंटरनेशनल स्कूल सिटी कैंपस के चाणक्य नायडू, वेल्हम ब्वॉयज स्कूल के श्रेयांश जिंदल, वेल्हम गर्ल्स स्कूल की तारा गोविल, एमकेपी इंटर कॉलेज की मदीहा नाज और द दून स्कूल के आर्यन भट्टाचार्जी के पैनल ने रस्किन बांड से सवाल किए। 
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रस्किन बांड - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद ओपन सत्र में भी स्कूली बच्चों ने उनसे सवाल पूछे। रस्किन बांड ने कहा कि आजकल बच्चे जल्दी बड़े हो रहे हैं। यही कारण है कि वे बच्चे नहीं उन्हें युवा कहना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि वैसे भी युवाओं के बीच रहना हमेशा अच्छा होता है।

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रस्किन बांड - फोटो : अमर उजाला
रस्किन बांड ने कहा कि लेखन में सफ लता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है। नाम और सम्मान पाने के लिए लगातार मेहनत और संघर्ष करने करना पड़ता है। इसके लिए आपको लगातार पढ़ना और लिखना पड़ता है।
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रस्किन बांड - फोटो : अमर उजाला
लीसा अग्रवाल के सवाल का जवाब देते हुए रस्किन बांड ने कहा कि कविताओं से बहुत ज्यादा कमाई नहीं होती लेकिन यह संतुष्टि देती हैं। उन्होंने कहा कि अपने अनुभवों, भावनाओं और संबंधों को मैंने भी कविता के रूप में लिखा, लेकिन बाद में मुझे अपने लेखन को बदलना पड़ा।
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पद्मभूषण रस्किन बांड - फोटो : अमर उजाला
बांड ने अपनी कविता इनफ  फॉर मी का पाठ भी किया। साथ ही विस्तार से उसका अर्थ भी समझाया। उन्होंने कहा कि यह पछतावे की कविता है। अपने लेखन के शुरुआती दौर में उन्होंने यह कविता लिखी थी।
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- फोटो : अमर उजाला
मदीहा नाज के सवाल पर रस्किन बांड ने कहा कि उन्हें प्रकृति के पास रहना अच्छा लगता है। कहा कि 1942 से वे मसूरी में रह रहे हैं। वैसे भी जिस जगह आप रहते हैं, उसका आपके लेखन पर बहुत असर पड़ता है। मैं हमेशा प्रकृति के बीच रहा, मुझे उस से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। इसलिए मैं चाहे कहीं भी जाऊं, वापस मसूरी लौट आता हूं।
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- फोटो : अमर उजाला
बच्चों के पसंदीदा लेखक रस्किन बांड बचपन में स्कूल जाना पसंद नहीं करते थे। उन्होंने बताया कि जब वे मसूरी में पढ़ते थे, तब कई बार स्कूल से भाग जाते थे। उनके पिता को यह बात पता चली तो उन्होंने बांड का एडमिशन शिमला के स्कूल में करा दिया। यहीं से बांड की आगे की पढ़ाई हुई।
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