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बारिश के बीच जयकारों के साथ हुआ झंडे जी का आरोहण, उमड़ा आस्था का सैलाब, तस्वीरों में अद्भुत नजारा...

Fri, 13 Mar 2020 09:49 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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झंडे जी - फोटो : अमर उजाला
देहरादून के ऐतिहासिक झंडे जी के आरोहण को बारिश के बीच आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भले ही पहली बार में झंडे जी का ध्वज दंड खंडित होने के कारण आरोहण संपन्न नहीं हो पाया, लेकिन दूसरी बार हुए आरोहण में श्रद्धालुओं ने दोगुनी ऊर्जा के साथ आरोहण में हिस्सा लिया। दिनभर बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह और जोश देखने को मिला। देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालु इस पवित्र रस्म के साक्षी बने। 
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झंडे जी के आरोहण में देहरादून के परमजीत सिंह को दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का सौभाग्य हासिल हुआ। परमजीत लकड़ी कारोबारी हैं। सहारनपुर चौक के समीप उनका व्यवसाय है। परमजीत के पिता ने करीब 104 साल पहले दर्शनी गिलाफ चढ़ाने की बुकिंग कराई थी, जिनका अब नंबर आया। 
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झंडे जी - फोटो : अमर उजाला
सुबह आठ बजे श्री गुरूराम राय दरबार साहिब के महंत देवेंद्र दास जी महाराज की उपस्थिति में संगतों ने झंडेजी को उतारने की प्रक्रिया शुरू की। करीब साढ़े नौ बजे झंडे जी को दही, घी, गंगाजल, पंचामृत से स्नान कराना शुरू किया गया। सुबह 10.15 बजे से  झंडे जी को सादा गिलाफ, सनील गिलाफ चढ़ाना शुरू हुआ। 

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झंडे जी - फोटो : अमर उजाला
दोपहर 2.30 बजे महंत जी महाराज ने संगतों को दर्शन दिए और संगतों ने महाराज जी का आशीर्वाद लिया। तीन बजे से  झंडे जी का आरोहण शुरू किया गया। सैकड़ों संगतों ने आरोहण के ऐतिहासिक क्षण में हिस्सा लिया। श्रद्धा व विधि-विधान के साथ झंडे जी का आरोहण शुरू हुआ। शाम 4.40 बजे तक झंडे जी के ध्वज दंड का हिस्सा खंडित हो गया। जिसके कारण आरोहण कार्यक्रम कुछ समय के लिए टाल दिया गया। 
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झंडे जी - फोटो : अमर उजाला
शाम करीब 6 बजे दोबारा झंडे जी का आरोहण कार्यक्रम विधिवत शुरू किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने और अधिक ऊर्जा के साथ हिस्सा लिया। देर शाम करीब 6.30 बजे के बाद झंडे जी को स्थापित किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं की तालियों की गड़गड़ाहट और महाराज जी के जयकारों से पूरा माहौल गूंज उठा। आरोहण के बाद से झंडेजी का एक महीने का मेला शुरू हो गया है। 
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झंडे जी - फोटो : अमर उजाला
झंडेजी को स्थापित करना बेहद मुश्किल रहा, लेकिन इनकी दिव्य शक्ति और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का ही नतीजा रहा कि प्रक्रिया सकुशल संपन्न हुई। आरोहण के समय श्रद्धालु महाराज के जयकारे लगाते रहे। वहीं, ढोल-नगाडों की थाप पर श्रद्धालुओं में ऊर्जा का संचार करती रही।
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झंडे जी - फोटो : अमर उजाला
मखमली वस्त्र, सुनहरे गोटों, चंवर से सुसज्जित कर झंडे जी का आरोहण किया गया। झंडे जी को लकड़ियों की कैंची के सहारे धीरे-धीरे खड़ा किया गया। श्री झंडा साहिब को स्थापित किया तो श्रद्धालुओं ने ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनकर खुद को सौभाग्यशाली समझा। इस दौरान श्रद्धालुओं की आंखें भी नम हो गई। 
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झंडे जी - फोटो : अमर उजाला
गुरू रामराय ने वर्ष 1676 में दून में डेरा डाला था। उनका जन्म 1646 में पंजाब के होशियारपुर जिले के कीरतपुर में होली के पांचवें दिन हुआ था। इसलिए दरबार साहिब में हर साल होली के पांचवें दिन उनके जन्मदिवस पर झंडे जी मेला लगाया जाता है। गुरू रामराय ने ही लोक कल्याण के लिए विशाल ध्वज को यहां स्थापित किया था। इस बार उनका 374वां जन्मदिवस धूमधाम से मनाया गया। 
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