टपकेश्वर मंदिर में नुकसान
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आज से पहले कभी नहीं दिखा ऐसा विकराल रूप
आचार्य डॉ. बिपिन जोशी ने कहा कि इस प्रकार का विकराल रूप कभी नहीं देखा। 25 साल से हम मंदिर में रह रहे हैं लेकिन कभी इसका आधा पानी भी नदी में नहीं आया। मंदिर के अंदर गर्भगृह सुरक्षित है। भगवान शिव की कृपा रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। उन्होंने बताया कि मंदिर में आपदा में ढहा पुल 1962 में बना था। यह पुल टपकेश्वर मंदिर से माता वैष्णो देवी गुफा, केवि बीरपुर के पीछे के गेट और आर्मी कैंट को जोड़ता था। जिसे गोरखा रेजिमेंट की ओर से बनाया गया था। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि अब 22 सितंबर से नवरात्र शुरू होने वाले हैं। भक्तों की सुविधा के लिए फिलहाल अस्थाई पुल का निर्माण कराया जाए।