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तस्वीरों में देखिए, ए-वन सुविधाओं से लैस स्ट्रीट डॉग्स का '5 स्टार' हॉस्पिटल

Thu, 25 Aug 2016 08:07 AM IST
चांद मोहम्मद/ अमर उजाला, देहरादून
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animal birth control center - फोटो : rajeev gupta/ amarujala
आवारा कुत्तों के ऑपरेशन के लिए खुला ये 'पांच सितारा' अस्पताल तमाम अत्याधुनिक संसाधन और सुविधाओं से लैस है। तस्वीरों में देखें...
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देहरादून के केदारपुरम में खुले उत्तराखंड के पहले एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर का शुभारंभ करने आई केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने खुद इस बात को स्वीकार किया। यही नहीं, निरीक्षण के बाद उन्होंने अन्य प्रदेशों में काम चलाऊ सेंटर होने की बात कहकर इसको देश का नंबर वन एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर बताया था।
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मंगलवार को सेंटर पर देहरादून मेयर विनोद चमोली और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेकानंद सती से अमर उजाला संवाददाता चांद मोहम्मद ने सेंटर की विशेषताओं को जाना।

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एबीसी सेंटर का मुख्यद्वार और दीवारों पर बने कुत्तों की पेंटिंग हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है। वहीं, शहर से रेस्क्यू कर लाए जाने वाले आवारा कुत्तों के रखने के लिए सेंटर में 72 कैनल बनाए गए हैं। ऑपरेशन से पहले और उसके तीन दिन तक कुत्तों को इन कैनलों में रखा जाएगा।
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कुत्तों के खाने पीने की व्यवस्था के लिए यहां रसोई घर बनाया गया है। कुत्तों की देखभाल को एक महिला और तीन पुरुष कर्मियों को तैनात किया गया है। इतना ही नहीं कैनलों के बाहर पार्कनुमा जगह छोड़ी गई है, जहां कुत्ते आराम से घूम सकें।
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सेंटर के लिए दो मोबाइल वाहन खरीदे जा रहे हैं। एक वाहन में करीब 15 कुत्तों को एक साथ रेस्क्यू कर लाया जा सकता है। आपात स्थिति में किसी कुत्ते के घायल होने पर ये वाहन एंबुलेंस का भी काम करेगा। इस वाहन का एक टोल फ्री नंबर भी जल्द जारी होगा। सूचना देने पर आपकी गली से कुत्ते को रेस्क्यू कर लिया जाएगा। 
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कुत्तों के ऑपरेशन के लिए ऑपरेशन थियेटर में तीन मशीनें हैं। कुत्तों के कैनल से लाकर सेव वगैरह कर ऑपरेशन के लिए तैयार किया जाएगा। यहां उनके ब्लड टेस्ट से लेकर हर तरह के टेस्ट किए जाएंगे, जिससे ऑपरेशन में कोई दिक्कत न आए। क्योंकि टेस्ट न होने की दशा में कई बार ऑपरेशन से कुत्ते की जान को खतरा रहता है। ब्लड टेस्ट के लिए सेंटर में ही लैब स्थापित होगी। फिलहाल शहर की किसी लैब पर ब्लड के सैंपल टेस्ट कराए जाएंगे। जबकि, दवाई और दस्तावेज सुरक्षित रखने के लिए अलग से कमरों की व्यवस्था की गई है।

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सेंटर के संचालन के लिए अमेरिकी कंपनी ह्यूमन सोसायटी इंडियन से करार किया गया है। कंपनी के दो पशु सर्जन दिन में करीब 20 से 25 ऑपरेशन करेंगे। कंपनी को 840 रुपये प्रति ऑपरेशन की दर से भुगतान किया जाएगा। डॉक्टरों के आने तक महापौर ने पशु चिकित्सा अधिकारी को दो से तीन ऑपरेशन रोजाना करते रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि कंपनी से करार हो गया है, कंपनी को शहर में सर्वे करना है। इसके बाद नियमित रूप से ऑपरेशन शुरू हो जाएगा। इस प्रक्रिया में एक माह का समय लगेगा।

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पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेकानंद सती ने बताया कि ऑपरेशन के समय प्राइवेट संस्थाओं की ओर से कुत्तों के कान पर ऑपरेशन के बाद वी शेप का एक चिह्न बना दिया जाता है। चिह्न से पहचान हो जाती है कि कुत्ते का ऑपरेशन हुआ है। लेकिन इसको वैक्सीन कब लगा और यह किस क्षेत्र का कुत्ता है। इसका पता नहीं चल पाता। उन्होंने बताया कि इसके निपटने के लिए वे कुत्ते के कान में विशेष टैग लगा रहे हैं, जिससे हर वर्ष उन्हें वैक्सीन देने में आसानी होगी। 
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महापौर विनोद चमोली ने बताया कि सेंटर के निर्माण में दो करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च हुए हैं। जिसमें 1.74 करोड़ प्रदेश व केंद्र सरकार और 50 लाख निगम ने वहन किया है। अब इसके संचालन में करीब एक करोड़ प्रति वर्ष का खर्च आएगा। दो साल में करीब 22 हजार कुत्तों के ऑपरेशन का लक्ष्य है। इसकी प्रतिपूर्ति करने के लिए सेंटर में ही पशु अस्पताल और शहर के पशु चिकित्सकों के लिए ट्रेनिंग सेंटर संचालित किया जाएगा। इसके बराबर में एक क्रैच भी बनाया जाएगा। जहां शहर से बाहर जाने पर डॉगी रखने के शौकीन अपने डॉगी यहां छोड़कर जा सकेंगे। उनसे नियत दर से शुल्क वसूला जाएगा।
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