दिन भर के हारे थके चार मजदूर घर को लौट रहे थे कि इसी बीच अंधेरी राह में पीछे से आई मौत ने उन पर झपट्टा मार दिया। इससे पहले कि कोई उन्हें वहां से उठाता सिस्टम के इस घुप अंधेरे में उनके जीवन की लौ बुझ चुकी थी।
दरअसल जिस जगह हादसा हुआ वहां पर दूर दूर तक रोशनी का कोई नामों निशान नहीं है। मसूरी डाइवर्जन से लेकर राजपुर के तिराहे तक का यह रास्ता पुराने पेड़ों से ढका है। इनसे दुबकाकर कुछ स्ट्रीट लाइट भी लगी हैं। मगर महीनों से इनमें से किसी में रोशनी का प्रस्फुटन नहीं होता है।
सड़क किनारे बने बंगले और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के बाहर टंगे कुछ बल्ब ही इस जगह रास्तों का अंदाजा लगाने का प्रयास करते हैं। अब यहां पर अंधेरा क्यों है इसका जवाब रात तक तो किसी के पास नहीं था।