वर्ष 2013 में आपदा का दंश झेल चुके बाबा केदार के धाम में अभी भी मौत का सिलसिला खत्म नहीं हुआ है। तीन साल बाद भी यात्रा शुरु होने के बाद अब तक 20 से ज्यादा तीर्थयात्री जान गंवा चुके हैं। वजह जानकर आप भी चौंक जाएंगे।
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तीन मई को कपाट खुलने के बाद से अभी तक ज्यादातर मौतें पैदल मार्ग पर हुई हैं। यात्रा पर होने वाली मौतों से प्रशासन के इंतजामों की पोल भी खुली है।
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बता दें कि तीर्थयात्रियों की मौत के पीछे कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है। इसके पीछे वजह है हार्ट अटैक। अभी तक अधिकांश मौतों की वजह हार्ट अटैक ही बताई जा रही है।
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एक माह के दौरान 20 तीर्थयात्रियों की हार्ट अटैक के कारण जान चली गई है। यात्रियों की इतनी बड़ी संख्या में हार्ट अटैक से मौत से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
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हार्ट अटैक से मरने वाले यात्रियों की उम्र 50 साल से अधिक हैं। प्रशासन ने 50 साल से अधिक उम्र के यात्रियों के लिए यात्रा पर जाने से पहले स्वास्थ्य की जांच को जरूरी किया हुआ है।
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कई लोगों का मानना है कि आपदा के बाद केदारनाथ का पैदल मार्ग लंबा हो गया है। पहले जहां 14 किमी पैदल रास्ता था, जो अब बढ़कर 17 किलोमीटर हो गया है।
साथ ही छोटी लिंचोली, गौरीकुंड और सोनप्रयाग से यात्रियों को केदारनाथ तक जाने के लिए कई स्थानों पर खड़ी चढ़ाई पर चढ़ना होता है। ऐसे में कईं बुजुर्ग इस रास्ते को पार नहीं कर पा रहे हैं।