प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुरु रहे ब्रह्मलीन स्वामी दयानंद सरस्वती को मरणोपरांत पद्म भूषण अवार्ड से नवाजा जाएगा।
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PM के गुरु को पद्म भूषण, पीएम बनकर मोदी खुद आए थे मिलने
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दुनिया को वेद-वेदांत और भारतीय दर्शन का बोध कराने वाले संत दयानंद 23 सितंबर-2015 को ब्रह्मलीन हुए थे। उन्हें आश्रम परिसर में 25 सितंबर को भू-समाधि दी गई थी।
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PM के गुरु को पद्म भूषण, पीएम बनकर मोदी खुद आए थे मिलने
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अपने जीवन के अंतिम दिनों में अस्वस्थ चल रहे आध्यात्मिक गुरु का हालचाल जानने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते साल 11 सितंबर-2015 को तीर्थनगरी आए थे। उन्होंने शीशमझाड़ी स्थित आश्रम पहुंचकर महाराज का हालचाल जाना था।
PM के गुरु को पद्म भूषण, पीएम बनकर मोदी खुद आए थे मिलने
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स्वामी दयानंद का जन्म 15 अगस्त, 1930 में मंजाकुडी गांव, तिरुवन्नरु, तमिलनाडु में हुआ। बचपन में उनका नाम नटराजन था। उनके पिता गोपाल अय्यर और माता बालंबाला था। चार भाइयों में सबसे बडे़ नटराजन की प्रारंभिक शिक्षा तमिलनाडु के कोडवसाल जिले में हुई। जब वह आठ साल के थे तभी उनके पिता का निधन हो गया था।
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मंजाकुड़ी तमिननाडु मूल के नटराजन (स्वामी दयानंद) की वाल्यकाल से ही आध्यात्म में गहरी रूचि थी, उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारी निभाने के लिए आजीविका के साधन के तौर पर सबसे पहले धार्मिक पत्रिका में बतौर पत्रकार काम किया। (तस्वीर में स्वामी दयानंद का हाल लेते पीएम नरेंद्र मोदी, फाइल फोटो।)
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वेदांत और उपनिषद में गहरी रुचि होने के कारण वह 1952-53 में स्वामी चिन्मयानंद से जुड़ गए। इसके बाद उन्हें चिन्मय मिशन में सचिव का दायित्व दिया गया।