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ट्रैफिक सिग्नल तोड़ा तो अब खैर नहीं, नियम तोड़ने वालों पर इन आपराधिक धाराओं में दर्ज होगा मुकदमा

Sun, 08 Jul 2018 09:59 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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traffic signal - फोटो : Quora
यातायात नियमों के उल्लंघन पर अब सिर्फ चालान भरने से पीछा नहीं छूटेगा। नई व्यवस्था के तहत कई मामलों में आपराधिक मुकदमे दर्ज होंगे, जिनमें दो साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इस बाबत परिवहन सचिव डी. सेंथिल पांडियन ने आदेश जारी किए हैं।
 
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दुर्घटना। - फोटो : amar ujala
परिवहन सचिव डी. सेंथिल पांडियन के अनुसार सरकार ने 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं में 50 फीसदी की कमी लाने का लक्ष्य है। इसके लिए यातायात के कुछ नियमों में बदलाव किया गया है। इसके लिए यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का प्रावधान किया गया है। कई धाराओं में अधिकतम दो साल की सजा और जुर्माने का भी प्रावधान है। 
 
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डेमो इमेज
कुल पांच तरह के अपराधिक प्रावधान 
शराब पीकर वाहन चलाना, ट्रैफिक लाइट जंप करना, ओवर स्पीड, ओवरलोडिंग और वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना। इन सभी मामलों में ज्यादातर घातक दुर्घटनाएं होती हैं।

 

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traffic police challan
धाराएं और सजा का प्रावधान 
आईपीसी की धारा-279 : सार्वजनिक मार्ग पर उतावलेपन से वाहन चलाना।
अपराध की प्रकृति- यह संज्ञेय अपराध और जमानती है। यह अपराध समझौते योग्य नहीं है। 
सजा-छह मास का कारावास या एक हजार रुपये जुर्माना या दोनों। 

 
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jail
आईपीसी की धारा-336 : ऐसा कृत्य जिससे किसी व्यक्ति का जीवन या वैयक्तिक सुरक्षा संकट में आए।
अपराध की प्रकृति- यह एक संज्ञेय अपराध और जमानती है। यह अपराध समझौते योग्य नहीं है। 
सजा-तीन माह का कारावास या 250 रुपये जुर्माना या दोनों। 

 
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jail
आईपीसी की धारा-337 : किसी कार्य द्वारा, जिससे मानव जीवन या किसी की व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में आए। 
अपराध की प्रकृति- यह एक संज्ञेय अपराध और जमानती है। हालांकि, यदि किसी को चोट पहुंचती है तो इस अपराध में पीड़ित द्वारा ही समझौता किया जा सकता है। 
सजा-छह माह कारावास या 500 रुपये जुर्माना या दोनों। 

 
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डेमो - फोटो : डेमो
आईपीसी की धारा-338 : ऐसा कार्य करना जिससे किसी को गंभीर चोट पहुंच सकती हो या पहुंचे। 
अपराध की प्रकृति- यह एक संज्ञेय अपराध और जमानती है। हालांकि, यदि किसी को चोट पहुंचती है तो इस अपराध में पीड़ित द्वारा ही समझौता किया जा सकता है। 
सजा-दो वर्ष कारावास या एक हजार रुपये जुर्माना या दोनों। 
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