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लॉकडाउन का एक साल: कोरोना की चपेट में रहे सीएम से लेकर मंत्री, पहली बार हुए कुछ फैसले, विपक्ष भी रहा मुखर

Tue, 23 Mar 2021 01:33 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में लॉकडाउन के दौरान की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
कोरोना संक्रमण के कारण तीन महीने के लिए लगे लॉकडाउन ने उत्तराखंड को कई तरह से नुकसान पहुंचाया। प्रदेश की विकास दर शून्य से भी नीचे पहुंच गई। ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भले ही कुछ हद तक बच पाई हो लेकिन कोरोना का संक्रमण प्रदेश के पर्यटन से लेकर कारोबार तक को प्रभावित कर गया। 

प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता की लकीर वैसे कोरोना के कारण शुरू हुए लॉकडाउन से पहले से ही खिंचनी शुरू हो गई थी। प्रदेश की विकास दर चार प्रतिशत तक पहुंच गई थी। कोरोना संक्रमण में तेजी आई तो लॉकडाउन मार्च में शुरू हुआ था और मई में जाकर खत्म हुआ। इसके बाद अनलॉक शुरू हुआ लेकिन लॉकडाउन की पाबंदियों ने तब तक खासा नुकसान पहुंचा दिया था।

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प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सहित उनकी सरकार के कई मंत्री भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आए थे। इससे सरकार का कामकाज भी प्रभावित हुआ। सचिवालय में भी काम काज लंबे समय तक बंद रहा। अधिकारियों को घर से काम करना पड़ा लेकिन यह सचिवालय को ज्यादा रास नहीं आया।
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विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
विधानसभा का हाईब्रिड सत्र
कोरोना संक्रमण के कारण विधानसभा को भी अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ी थी। खुद विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल कोरोना से संक्रमित हुए और इस कारण विधानसभा सत्र की जिम्मेदारी विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान को संभालनी पड़ी थी। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश भी संक्रमण के कारण सत्र में शामिल नहीं हो पाई थीं।
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उत्तराखंड में लॉकडाउन - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
आर्थिक तंगी के चलते सरकारी कर्मचारियों का कटा वेतन
कोरोना संक्रमण की मार राजकीय कर्मचारियों पर भी पड़ी। सरकार को उनके एक दिन का वेतन काटने का फैसला करना पड़ा। विभागों का 50 प्रतिशत बजट फ्रीज किया गया और वित्त विभाग का स्पष्ट आदेश था कि फ्रीज किए गए बजट का उपयोग केवल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ही किया जाए।

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उत्तराखंड में लॉकडाउन - फोटो : फाइल फोटो
प्रदेश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ाई
कोरोना की मार से प्रभावित प्रदेश की अर्थव्यवस्था अभी तक पटरी पर नहीं आ पाई है। वर्तमान में भी प्रदेश की आर्थिक विकास दर शून्य से नीचे ही मानी जा रही है। राहत की बात यह है कि अगले वित्तीय वर्ष में इसकी भरपाई होने की उम्मीद है। इतना होने पर भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था की धुरी माना जाता पर्यटन खासा प्रभावित हुआ। इसका असर कारोबार पर भी पड़ा। 12 हजार करोड़ रुपये के कारोबार वाली चार धाम यात्रा बिलकुल ही ठप होकर रह गई। इसका असर शहरी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर अधिक पड़ा और बेरोजगारी दर में तेजी से इजाफा हुआ। 
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कांग्रेस का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
महंगाई में इजाफा, विपक्ष को भी मिला मौका
कोरोना का एक नुकसान प्रदेश की महंगाई की दर पर भी पड़ा। प्रदेश में महंगाई दर पहले से ही राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है। कोरोना काल में इसमें और इजाफा हुआ। यही वजह रही कि महंगाई को लेकर विपक्ष भी इस दौरान खासा मुखर रहा। 
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बाजार में भीड़ - फोटो : अमर उजाला
दूसरे दौर के संक्रमण की आशंका ने डराया
कोरोना संक्रमण दोबारा पैर पसार रहा है। ऐसे में अब फिर से लोगों में डर पैदा हो रहा है। वहीं, अब प्रदेश की आर्थिकी को लेकर बहुत हद तक राहत की उम्मीद भी है। 15वें वित्त आयोग ने करीब 90 हजार करोड़ रुपये पांच साल के लिए मिले हैं। आयोग ने 28 हजार करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान भी दिया। जीएसएटी प्रतिपूर्ति की भरपाई भी केंद्र ने शुरू कर दी है। यही कारण है कि सरकार अगले वित्तीय वर्ष में 57 हजार करोड़ रुपये का बजट लेकर आ पाई।
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