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Commonwealth Games: पहाड़ के पूत से पदक की आस, पढ़ें- कुशाग्र के फेफड़े मजबूत करने की कहानी और पिता का जुनून

Thu, 21 Jul 2022 01:07 PM IST
रेनू सकलानी अभिषेक सिंह, अमर उजाला, देहरादून
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कुशाग्र - फोटो : अमर उजाला
बर्मिंघम में 28 जुलाई से शुरू होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की तैराकी प्रतियोगिता में भारतीय टीम का तीन वर्गों में प्रतिनिधित्व करने वाले उत्तराखंड के लाल कुशाग्र से पदक की आस है। राष्ट्रीय खेलों में तीन गोल्ड और एक सिल्वर के साथ रिकॉर्ड कायम करने वाले कुशाग्र इन दिनों प्रशिक्षण के लिए मैनचेस्टर में हैं और वहीं से बर्मिंघम रवाना होंगे।

उत्तराखंड के चमोली जिले के कफलोड़ी गांव निवासी हुकुम सिंह रावत के बेटे कुशाग्र दिल्ली में पैदा हुए और वहीं से पढ़ाई-लिखाई और तैराकी के गुर सीखे। बचपन में दमे के मरीज रहे कुशाग्र के फेफड़े मजबूत करने के लिए पिता हुकुम सिंह ने इन्हें स्वीमिंग सिखाने का फैसला लिया, जो बाद में जुनून में बदल गया।

देखते ही देखते कुशाग्र तैराकी में चैंपियन हो गया और 2019 में उसने टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया था। कोरोना काल में तैयारी प्रभावित हुईं, जिससे वह टोक्यो के लिए ए कट बनाने में विफल रहे। जून में वर्ल्ड चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ के लिए भी क्वालीफाई कर लिया था।
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कुशाग्र - फोटो : अमर उजाला
हंगरी में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। हालांकि, पिछले साल राष्ट्रीय खेलों में उन्होंने जबरदस्त वापसी की और दिल्ली के लिए तीन गोल्ड के साथ एक सिल्वर जीतकर तीन रिकॉर्ड भी बनाए थे। कुशाग्र ने 400 मीटर, 800 मीटर और 1500 मीटर फ्रीस्टाइल में तीन स्पर्धाओं में बी टाइमिंग हासिल करते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देकर अपना दबदबा कायम किया। कुशाग्र ने बताया कि मुझे अपनी रफ्तार वापस मिल गई है, जिसका फायदा निश्चित ही राष्ट्रमंडल खेलों में मिलेगा।
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कुशाग्र - फोटो : अमर उजाला
हाल ही में स्टेट बैंक से बतौर मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए हुकुम सिंह रावत ने बताया कि बेटे की लगन को देखते हुए और तबादले की वजह से उसकी तैयारियों पर असर की आशंका के बीच कई बार प्रमोशन से मना कर दिया। बताया कि कोरोना के दौरान खिलाड़ियों को तैयारी के लिए छूट मिलती तो टोक्यो में निश्चित ही भारतीय टीम के पदकों की संख्या ज्यादा होती। फोन पर हुई बातचीत में बताया कि जून में ही पूजा में भाग लेने के लिए गांव आया था। बेटा पदक जीतकर लौटा तो उसे भी गांव लेकर आऊंगा।

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कुशाग्र - फोटो : अमर उजाला
पिता हुकुम सिंह के मुताबिक, कुशाग्र को बचपन से पानी में खेलने का शौक था। स्कूल में पूल था तो उसे और मजा आने लगा। इस बीच कुशाग्र को दमे की बीमारी का पता चला तो डॉक्टर ने फेफड़ों को मजबूत करने के लिए स्वीमिंग की सलाह दी।

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कुशाग्र - फोटो : अमर उजाला
स्कूल में होने वाली तैराकी प्रतियोगिताओं में अव्वल आने लगा तो 2012 में पेशेवर तरीके से तालकटोरा में स्वीमिंग शुरू कराई। उसकी पहली कोच एडना शर्मा थी। प्रशिक्षण के लिए ऑस्ट्रेलिया गया तो वहां ऑस्ट्रेलियाई टीम के कोच माइकल बोल ने दो महीने प्रशिक्षण दिया, वहां से प्रशिक्षण के लिए यूएस भी गया। 
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