टिहरी में मलबे में दबा मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आसपास के क्षेत्रों में भी नुकसान
गेंवाली में बादल फटने से बालगंगा और भिलंगना नदी का जलस्तर बढ़ गया जिससे अन्य क्षेत्रों में भी नुकसान हुआ है। बूढ़ाकेदार नदी के उफान पर आने से बूढ़ाकेदार में कई मकानों को खतरा पैदा हो गया है और एक शौचालय नदी में समा गया। सुमार्थ गांव में एक मकान खतरे की जद में आ गया है, जिससे परिवार को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है। एक मवेशी भी मलबे में दब गया। ठेला गांव में एक पैदल पुलिया और सिंचाई नहर क्षतिग्रस्त हो गई है। इधर, चकरेड़ा में पांच परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। नैलचामी में एक भैंस मलबे में दब गई। ठेला, कुरालगाड़, चकरेड़ा, सरोली, धरगांव छपरगाढ़, घरगांव और जुकानी गांव की पेयजल योजनाएं भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। वहीं गवाणा तल्ला में गांव की कई हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ की भेंट चढ़ गई है। ग्राम प्रधान सीता शाह ने बताया कि गांव को जोड़ने वाला पैदल पुल भी खतरे में है।