मानसून के सक्रिय होने से पहले ही बादल फटने के मामले पिछले कुछ सालों से सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक बादलों का फटना माइक्रो क्लाइमेट पर भी निर्भर करता है। 2018 में ही मई माह में चमोली के नारायणबगड़ क्षेत्र में बादल फटने का पहला मामला सामने आया था। इसके बाद एक जून को टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, पिथौरागड़ में बादल फटने की घटना सामने आई थी। इसी तरह केदारनाथ आपदा भी 16-17 जून 2013 को आई थी। इस समय तक प्रदेश में मानसून सक्रिय नहीं हुआ था।