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पर्वतारोही पति को कफन में लिपटा देख बदहवास हुई पत्नी, पैर छूकर फूट-फूटकर रोई, तस्वीरें...

Fri, 05 Jul 2019 10:16 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
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पर्वतारोही चेतन पांडेय की पत्नी मानसी - फोटो : अमर उजाला
नंदा देवी पर्वत से रेस्क्यू कर लाए गए पर्वतारोही पति को ताबूत में देखकर पत्नी का सब्र जवाब दे गया। पर्वतारोहियों के गाइड रहे चेतन पांडे की पत्नी पति को देख बदहवास हो गईं। मानसी ने पति के पैर छुए और फूट-फूटकर रोईं। उन्हें ऐसे देख वहां हर कोई भावुक हो गया। 
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पर्वतारोही चेतन पांडेय की पत्नी मानसी - फोटो : अमर उजाला
चेतन पांडे का शव घर आने का पत्नी मानसी पांडे इंतजार कर रही थीं। वह किसी से बात करने को तैयार नहीं थीं। सेना की गाड़ी से शव उतारते देख पत्नी का सब्र जवाब दे गया। वह फफक-फफक कर रोते हुए परिजनों से लिपट गईं। 
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पर्वतारोही चेतन पांडेय की पत्नी मानसी - फोटो : अमर उजाला
अल्मोड़ा जिले के लक्ष्मेश्वर निवासी गाइड चेतन पांडे के साथ विदेशी पर्वतारोही जून में नंदा देवी बेस कैंप गए थे। बर्फीले तूफान की चपेट में आने से सात विदेशियों सहित चेतन की मौत हो गई। छह लोगों के साथ चेतन का शव हवाई मार्ग से हल्द्वानी आर्मी हैलीपैड पर लाया गया। यहां से सेना के जवान शव को लेकर शवगृह आए। 

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पर्वतारोहियों के शवों को लाते सेना के जवान - फोटो : अमर उजाला
शव आने से पहले चेतन पांडे की पत्नी मानसी, भाई हिमांशु पांडे सहित परिवार के अन्य सदस्य शवगृह के सामने बैठकर इंतजार कर रहे थे। सेना की गाड़ी आने पर वह शवों के बीच पति को पहचानने के लिए दौड़ पड़ी। कपड़ों में लिपटे पति का चेहरा देखने के लिए पोस्टमार्टम रूम में पहुंच गई लेकिन शव पैक था। 
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पर्वतारोही चेतन पांडेय - फोटो : अमर उजाला
गाइड चेतन पांडे के सिर और सीने में गंभीर चोट लगी थी। पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों ने ये बातें बताई। पता चला है कि बर्फीले तूफान के बीच गिरने से चोट लगी है। उनकी शिक्षा एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में हुई।
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पर्वतारोहियों के शवों को लाते सेना के जवान - फोटो : अमर उजाला
उसके बाद उन्होंने पर्वतारोहण के क्षेत्र में अल्मोड़ा से ही करियर की शुरुआत की। पूर्व में विशेष कार्याधिकारी साहसिक पर्यटन अल्मोड़ा से प्रशिक्षण लिया और फिर अल्मोड़ा में अंशकालिक प्रशिक्षक भी रहे। बाद में उन्होंने नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग से बेसिक और एडवांस कोर्स किया। 
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नंदा देवी चोटी पर बर्फ में दबे शव - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद भारतीय पर्वतारोहण संस्थान नई दिल्ली से लाइजन ऑफिसर का प्रशिक्षण लिया और कई विदेशी दलों के साथ लाइजन ऑफिसर के तौर पर पर्वतारोहण के लिए गए। उन्होंने मुख्य रूप से छांगुस, स्टॉककांगड़ी, पनवालीद्वार, नंदाखाट, चीरिंग आदि चोटियों में सफल पर्वतारोहण किया था।
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