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छठ पूजा 2020: डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते समय व्रती इस एक बात का जरूर रखें ध्यान...

Fri, 20 Nov 2020 12:56 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : फाइल फोटो
चार दिवसीय लोक आस्था के महापर्व छठ पर आज व्रती घर पर बनाए घाट पर खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे। वहीं, शनिवार सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत भी संपन्न हो जाएगा। लेकिन इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है।
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- फोटो : फाइल फोटो
छठ की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें सादगी और पवित्रता को खास महत्व दिया जाता है। इसके अलावा प्रसाद बनाने में चावल, गुड़ और गेहूं का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही इस महापर्व की विशेषता है कि इसमें किसानों, ग्रामीण जन जीवन और परंपराओं को महत्व दिया जाता है।
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- फोटो : फाइल फोटो
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक छठ महापर्व के दौरान पीतल व तांबे से बने पात्र से ही अर्घ्य देना चाहिए। तांबे के पात्र में दूध से अर्घ्य नहीं देना चाहिए। वहीं, चांदी, स्टील, शीशा, और प्लास्टिक के पात्र वर्जित माने जाते हैं।

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- फोटो : फाइल फोटो
वेदाचार्यों के मुताबिक छठ खासकर शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का पर्व है। सूर्य देव की आराधना का यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। चैत्र शुक्ल षष्ठी व कार्तिक शुक्ल षष्ठी इन दो तिथियों को यह पर्व मनाया जाता है। कार्तिक शुक्लपक्ष षष्ठी पर जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। 
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- फोटो : फाइल फोटो
हालांकि कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाए जाने वाला छठ पर्व मुख्य माना जाता है। कार्तिक छठ पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व को छठ पूजा, डाला छठ, छठ मैया पूजा, सूर्य षष्ठी पूजा जैसे नामों से भी जाना जाता है।
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