23 जुलाई के बाद शादी के इच्छुक कुंवारों को चार माह का इंतजार करना होगा। 23 जुलाई से चातुर्मास शुरू होने के कारण सभी मांगलिक कार्य रुक जांएगे। जिस कारण विवाह संस्कार, जातकर्म संस्कार और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य रुक जाते हैं।
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डेमो
- फोटो : डेमो
पंडित विपिन चंद्र जोशी ने बताया कि चातुर्मास 23 जुलाई से 19 नवंबर 2018 तक रहेंगे। तब तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाएंगे। मान्यता के अनुसार विवाह के समय भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप की पूजा की जाती है।
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lord vishnu
23 जुलाई 2018 को देवशयनी एकादशी है। इस दौरान भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाएंगे। इसलिए वैवाहिक कार्य नहीं किए जा सकेंगे। चार माह बाद 19 नवंबर को कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी देवोत्थानी एकादशी मनाई जाएगी। जिसके बाद मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।
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जैन साधु
जैन एवं बौद्ध समाज में चातुर्मास का विशेष महत्व है। इस दौरान इन समाजों के मुनि भ्रमण नहीं करते एक ही स्थान पर रुक जाते हैं और वहीं अपनी पूजा ध्यान करते हैं। चातुर्मास में पूजन का विशेष महत्व है। इसी कारण संत जहां होते हैं वहीं पूजा-अर्चना शुरू कर देते हैं।
चातुर्मास में फर्श पर सोना और सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना और अधिकतर समय मौन रहना शुभ माना जाता है। साधुओं के इसके लिए कठोर नियम होते हैं। उन्हें दिन में केवल एक ही बार भोजन करना होता है।