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Chardham Yatra : बदरीनाथ के अभिषेक के लिए पिरोया गया तिल का तेल, राजदरबार से रवाना होगी गाडू घड़ा कलश यात्रा

Thu, 25 Apr 2024 02:31 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, नरेंद्रनगर टिहरी
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तिल का तेल पिरोती महिलाएं। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रतीक भू-बैकुंठ भगवान बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बदरी विशाल के अभिषेक के लिए नरेंद्रनगर राजमहल में तिलों का तेल पिरोया गया। टिहरी सांसद महारानी माला राज्य लक्ष्मी शाह ने नगर क्षेत्र की सुहागिन महिलाओं के साथ व्रत रखकर मूसल-ओखली और सिलबट्टे से तिलों का तेल पिरोया।

इसके बाद तेल गाडू घड़े में रखा गया। तेल पिरोने की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद घड़ा तेल कलश यात्रा रवाना हो गई। कई जगहों पर विश्राम के बाद गाडू घड़ा यात्रा 11 मई को बदरीनाथ पहुंचेगी। 12 मई को प्रात: छह बजे बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धलुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। बृहस्पतिवार को सुबह बदरीनाथ डिमरी (सरुला) धार्मिक केंद्रीय पंचायत चमोली के पदाधिकारी मिष्ठान-भोग लेकर राजदरबार नरेंद्रनगर पहुंचे।

दरबार में तिलों का तेल पिरोने की पौराणिक परंपरा का पालन करते हुए राजपुरोहित कृष्ण प्रसाद उनियाल ने महारानी राज्यलक्ष्मी शाह और महारानी की बेटी श्रीजा अरोड़ा के हाथों विधि विधान से पूजा-अर्चना कर तेल पिरोने की शुरुआत की। इस दौरान राज दरबार को फूल-मालाओं से सजाया गया था। तेल निकालने के स्थल को चारों ओर से चांदनी से ढका गया था।

 
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बदरीनाथ के अभिषेक के लिए पिरोया गया तिल का तेल,  - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
माला के अगुवाई में व्रत धारण किए नगर क्षेत्र की 70 से अधिक सुहागिन महिलाओं ने परंपरा अनुसार पीले वस्त्र धारण कर तिलों का तेल पिरोया। तेल में थोड़ा भी पानी न रहे इसके लिए विशेष बर्तन में जड़ी बूटी डालकर तेल पकाया गया। भगवान बदरी विशाल की मूर्ति के अभिषेक के लिए छह माह तक प्रयोग होने वाला यह शुद्ध तिलों का तेल मंत्रोच्चार के साथ यह गाडू घड़ा तेल कलश में परिपूरित किया गया।
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बदरीनाथ के अभिषेक के लिए पिरोया गया तिल का तेल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
महाराजा मनुज्येंद्र शाह, महारानी शाह और राजकुमारी श्रीजा सहित तेल पिरोने आईं सुहागिन महिलाओं और बालिकाओं को प्रसाद स्वरूप भोग खिलाकर उनका व्रत खोला। पूजा अर्चना के बाद तेल कलश की शोभायात्रा वाद्य यंत्रों के साथ बदरीनाथ धाम को रवाना की गई। यह यात्रा 11 मई की शाम को बदरीनाथ पहुंचेगी। इस मौके पर संवि अरोड़ा, अहाना अरोड़ा, धार्मिक केंद्रीय पंचायत डिम्मर के सचिव भगवती प्रसाद डिमरी, संजय डिमरी आदि मौजूद थे।

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बदरीनाथ के अभिषेक के लिए पिरोया गया तिल का तेल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
राजमहल से शुरू हुई गाडू घड़ा कलश यात्रा का बृहस्पतिवार की रात को ऋषिकेश में बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति के चेला चेतराम धर्मशाला में विश्राम होगा। 26 अप्रैल को यात्रा का रात्रि प्रवास श्री शत्रुघ्न मंदिर के रामझूला मुनिकी रेती में होगा। डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने बताया, 27 अप्रैल को यात्रा शिवपुरी, व्यासी, कौड़ियाला, देवप्रयाग होते हुए रात्रि विश्राम को डालमियाय धर्मशाला श्रीनगर पहुंचेगी।
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चारधाम यात्रा - फोटो : अमर उजाला
28 अप्रैल को श्रीनगर से रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग होेते हुए डिमरी पुजारियों के मूल गांव डिम्मर स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर पहुंचेगी। जहां सात मई तक गाडू घड़े की प्रतिदिन पूजा-अर्चना की जाएगी। आठ मई को डिम्मर से विभिन्न पड़ावों से होते हुए यात्रा पाखी गांव पहुंचेगी। नौ मई को टंगनी, रविग्राम होते हुए यात्रा रात्रि प्रवास को श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ पहुंचेगी। 10 मई को रात्रि प्रवास को योग बदरी पांडुकेश्वर पहुंचेगी। 11 मई रात को गाडू घड़ा यात्रा श्री बदरीनाथ धाम पहुंचेगी। रविवार 12 मई को सुबह छह बजे श्री बदरीनाथ धाम के कपाट तीर्थ यात्रियों के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।
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