भूकंप से कम हुआ ताल का जल स्तर
मार्च 1999 में चमोली में आए भूकंप से बधाणीताल के जल स्तर पर भी प्रभाव पड़ा है। बताया जाता है कि भूकंप के कारण ताल के मुख्य स्रोत से पानी निकलने की गति कम होने के कारण ऐसा हुआ है। अनुमान के मुताबिक ताल की गहराई लगभग 5 मीटर रह गई है।
ये भी पढ़ें...Chardham Yatra: आठ राज्यों के लिए एडवाइजरी जारी, भारी वाहन प्रतिबंधितए जानें और किन चीजों पर है रोक
पर्यटन/तीर्थाटन को मिलेगा बढ़ावा
बधाणीताल को इको पर्यटन का केंद्र बनाने के लिए पर्यटन विभाग ने तीन करोड़ का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। इस धनराशि से जहां ताल के चारों तरफ के क्षेत्र को संरक्षित किया जाएगा। वहीं, पर्यटकों के लिए पाथ-वे, पार्क और अन्य सुविधाएं जुटाई जाएंगी। इस ताल के विकसित होने से मयाली से बांगर और द्यूली सौड़ से पंवालीकांठा में पर्यटन, ट्रेकिंग और एडवेंचर को भी नया आयाम मिलता। साथ ही पुजार गांव स्थित आदिगुरू शंकराचार्य द्वारा निर्मित प्राचीन वासुदेव मंदिर भी तीर्थाटन का केंद्र बनेगा।
होटल, लॉज की नहीं सुविधा
जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग से बधाणीताल 59 किमी दूर है। यहां पहुंचने के लिए तिलवाड़ा-मयाली-रणधार मोटर मार्ग से पहुंचता जाता है। यहां होटल, लॉज की सुविधा नहीं है। इसलिए पर्यटकों को रात्रि प्रवास के लिए मयाली, तिलवाड़ा या रुद्रप्रयाग पहुंचना पड़ेगा।
बधाणीताल को जनपद का इको पर्यटन का केंद्र बनाने के लिए प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। तीन करोड़ रुपये के प्रस्ताव को तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। आचार संहिता खत्म होते ही प्रस्ताव को स्वीकृति मिल जाएगी, जिसके बाद जरूरी कार्य शुरू किए जाएंगे। - राहुल चौबे, जिला पर्यटन एवं सहासिक खेल अधिकारी रुद्रप्रयाग