गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर जमाणियों (डोली ले जाने वाले) के कांधों पर सवार डोली चिरबासा, जंगलचट्टी होते हुए सात किमी का सफर तय सुबह साढ़े दस बजे भीमबली पहुंची। यहां पर बाबा केदार की डोली को भीमशिला के समीप रखा गया। अल्प विश्राम के उपरांत पूर्वान्ह 11.30 बजे डोली भीमबली से धाम के लिए आगे बढ़ी और रामबाड़ा, छोटी लिनचोली, बड़ी लिनचोली, छानी कैंप, रुद्रा प्वाइंट होते हुए नौ बर्फ से प्रभावित रास्ते के बीच से अपराह्न तीन बजे अपने धाम केदारनाथ पहुंची, जहां पर मुख्य पुजारी द्वारा सभी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया।