अब चारधाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु राजस्थान के बगरू प्रिंट के कुर्ते पहनकर ही चारों धाम में दर्शन कर सकेंगे। यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जल्द ही इन कुर्तों को ड्रेस कोड के रूप में लागू किया जाएगा। स्थानीय लोगों को रोजगार देने के लिए यह कदम उठाया गया है।
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इस तरह का होगा कुर्ता
बदरी केदारनाथ मंदिर समिति यह फैसला बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में लागू करने पर विचार कर रही है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के सीईओ बीडी सिंह ने बताया कि बगरू प्रिंट के कुर्ते और ओढ़नी बनाने वाले राजस्थान के उत्पादकों से समिति की बातचीत चल रही है।
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केदारनाथ धाम
- फोटो : अमर उजाला/विनय बहुगुणा
किसी को भी काम देने से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि चमोली जिले में एक यूनिट स्थापित की जाए, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके। सिंह का कहना है कि इससे सालाना करीब 40 करोड़ की आय संभव है।
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- फोटो : अमर उजाला
ड्रेस कोड में लागू किए जाने वाले परिधानों से मंदिर में सौम्य माहौल तैयार होगा व स्थानीय गरीबों को रोजगार मिलेगा। गौरतलब है कि इस बार चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं का आंकड़ा आठ दिन के भीतर ही एक लाख पार कर गया है। ऐसे में इस पहल से स्थानीय निवासियों को आय का बड़ा स्रोत मिल सकता।
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परिधानों की खासियत: बगरू प्रिंट के परिधान केसरिया रंग के होंगे। इन पर सभी धामों के देवी-देवताओं का जयघोष (हर हर गंगे, जय केदार बाबा, जय गंगोत्री, जय यमुनोत्री, जय बद्री विशाल, जय केदारनाथ) अंकित होंगे।
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धामों में ड्रेस कोड लागू करने के लिए बदरी केदारनाथ मंदिर समिति की ओर से आदेश जारी किया जाएगा। इसके बाद धाम में वही व्यक्ति प्रवेश कर पाएगा, जिन्होंने उक्त परिधान पहने होंगे। ड्रेस कोड की यह व्यवस्था देश के कई मंदिरों में पहले से ही लागू है। उज्जैन के महाकाल मंदिर में भी महिलाएं व पुरुष बिना ड्रेस कोड के दर्शन पूजन नहीं कर सकते।
नौ मई को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद यात्रा का आगाज हुआ था। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 15 मई तक 48 हजार 591 श्रद्धालुओं ने केदारनाथ धाम पहुंच बाबा के दर्शन किए। एक सप्ताह के भीतर दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का यह नया रिकॉर्ड है।