गुजरात के गिर नेशनल पार्क की एशियाटिक शेरनियों ने ऐसी सूझबूझ दिखाई है कि शेर समाज की पुरातनकाल से चली आ रही कुरीति बंद हो गई।
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asiatic lion of gir national park
- फोटो : gujrattourism
अमूमन एक शेर जब किसी इलाके पर काबिज होता है तो सबसे पहले दूसरे शेरों के शावकों की हत्या करता है, फिर वहां की शेरनियों को अपने ‘हरम’ में शामिल कर लेता है। लेकिन गिर नेशनल पार्क में शेर शावकों को मारते नहीं बल्कि पालते हैं।
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एशियाटिक शेरों के सोशल सिस्टम पर भारतीय वन्य जीव संस्थान के 10 साल में पूरे हुए शोध के खुलासे ने विश्व के वन्यजीव विज्ञानियों को हैरत में डाल दिया है।
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एक वक्त था जब एशियाटिक शेर साउथ अफ्रीका, अफगानिस्तान, ग्रीक समेत यूरोपीय देशों में धमाचौकड़ी मचाया करते थे। लेकिन डेढ़ सौ साल पहले ब्रिटिश शासनकाल के दौरान सब मारे गए। अब दुनिया में गुजरात का गिर नेशनल पार्क ही ऐसी जगह है जहां एशियाटिक शेर आबाद हैं।
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इनकी संख्या तेजी से कम होने लगी थी। तभी शेरनियों ने इस पर लगाम लगाने के लिए मोर्चा संभाल लिया। शोध में बताया गया कि शेरों की नस्ल को खत्म कर रही सबसे बड़ी कुरीति ‘शिशु हत्या’ शेरनियों की वजह से बंद हो गई। इसके साथ ही शेरनियों ने शेरों पर दबदबा कायम किया है।
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भारतीय वन्य जीव संस्थान के शोध में बताया गया कि शेरनियों ने इस कुरीति को खत्म करने के लिए पारिवारिक ढांचे और मेटिंग सिस्टम (मिलन काल) में बदलाव किया है। साउथ अफ्रीका के शेरों की तरह गिर में शेरनियां और शेर एक साथ नहीं रहते। अलग-अलग रहते हैं। सिर्फ मेटिंग सीजन में कुछ दिनों के लिए वे साथ आते हैं।
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- फोटो : AmarUjala
एशियाटिक शेरनियों ने एक अनूठा तरीका अपनाया है। मेटिंग सीजन में शेरनियां बारी-बारी हर शेर के साथ रहती हैं। जब उनके शावक पैदा होते हैं तो हर शेर उन्हें अपने ही बच्चे मानता है और उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाता। एशियाटिक शेरनियों के स्वभाव के इस बदलाव से आज गिर में शेरों की संख्या पांच सौ हो गई है।
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एशियाटिक शेरों की उत्पत्ति साउथ अफ्रीका में हुई थी। 40 हजार साल पहले ये दुनिया के अलग-अलग देशों में गए। इन्हें बब्बर शेर भी कहा जाता है। बाद में इनकी नस्लों में तब्दीली आती गई।
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जांचों में पाया गया कि इस बदलाव में भारतीय एशियाटिक शेरों के मस्तिष्क में रक्तवाहिनियों की संख्या अधिक हुई। वर्तमान में साउथ अफ्रीकी शेर और एशियाटिक शेर के गले और पीठ के बालों पर भी फर्क आया।
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शेर अपने बच्चों को पालते हैं, दूसरे के नहीं, लेकिन गिर की शेरनियों ने नया तरीका अपनाया है। शेर सभी शेरनियों के शावकों को अपना समझते हैं। यह गिर के एशियाटिक शेरों का अपना अनूठा सोशल सिस्टम है। साउथ अफ्रीकी शेरों का वही पुराना सिस्टम चला आ रहा है। गिर की शेरनियों ने बड़ी सूझबूझ से काम लिया है। प्रसव के बाद शेरनियां डेढ़ दो साल तक मेटिंग नहीं करतीं। बच्चों की परवरिश करती हैं।
- डॉ. वाईवी झाला, रिसर्च टीम लीडर, वरिष्ठ शेर एवं बाघ विज्ञानी भारतीय वन्य जीव संस्थान