Chamoli Tunnel Landslide News: हादसे के दौरान करीब 16-17 लोग एक जगह पर थे। जबकि बिजली ऑपरेटर, प्लंबर के साथ ही कुछ अन्य लोग भी वहां मौजूद थे। जैसे ही सैलाब आया तो सभी बचाओ-बचाओ चिल्लाने लगे।
टीएचडीसी की टीआर टनल से बचकर बाहर आए घायल मजदूर सदमे में हैं। टनल में अचानक ऑक्सीजन लेवल कम होने से मजदूरों की सांस फूल रही थी। कांपते शब्दों में उन्होंने बताया कि जिस जगह पर भूस्खलन हुआ, वहां बुधवार को मिट्टी खिसक गई थी। इसके धंसने की आशंका थी। यह टनल दुर्गापुुर से सियासैंण तक करीब तीन किलोमीटर तक निर्मित हो रही है। हादसा करीब डेढ़ किमी पर हुआ है।
बताया जा रहा है कि हादसे के दौरान करीब 16-17 लोग एक जगह पर थे। जबकि बिजली ऑपरेटर, प्लंबर के साथ ही कुछ अन्य लोग भी वहां मौजूद थे। एक घायल ने बताया कि वे कीचड़ में आधा हिस्से तक फंस गए थे, जैसे-तैसे जान बची। हादसे में घायल छत्तीसगढ़ निवासी सुनील दीवान ने जिला अस्पताल में बताया कि वे टनल के अंदर सरिया से सेटरिंग बना रहे थे। एक साथ वे करीब 17 लोग थे।
अचानक करीब 150 मीटर दूर तेज आवाज के साथ भारी भूस्खलन हुआ और मलबा, पानी व पत्थर तेज गति से टनल के अंदर घुस आए। इसके धक्के से कई लोग दूर जा गिरे, जबकि कुछ लोग मलबे में दब गए।
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चमोली टनल हादसे के बाद टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हम मलबे के धक्के से टनल के बाहर की ओर आ गए। मजदूर बचाओ-बचाओ चिल्ला रहे थे। टनल में कई जगह से मलबा आने से ऑक्सीजन लेवल बेहद कम हो गया था। कुछ लोग दम घुटने के कारण मलबे में आगे चल नहीं पा रहे थे। शुक्र है समय पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो गया।
ओडिशा निवासी जगेश्वर ने बताया कि वह टनल से निकलने वाले पानी को पंप के जरिये बाहर भेजने का काम करता है। शाम करीब 6:10 बजे अचानक तेज आवाज सुनाई दी, जो बेहद भयावह थी।
इसी दौरान टनल की बिजली भी गुल हो गई। हादसे के समय वह घटनास्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर था। टनल में तेज आवाज सुनी तो किसी अनहोनी की आशंका हुई। अन्य लोगों को इसकी जानकारी दी।