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Chamoli: बवंडर से बच निकले श्रमवीरों के हौसले बुलंद, बोले-बदरीनाथ की भूमि पर काम करने का सौभाग्य, फिर लौटेंगे

Wed, 05 Mar 2025 03:11 PM IST
रेनू सकलानी प्रमोद सेमवाल/प्रदीप भंडारी, संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली

सार

चमोली हिमस्खलन की चपेट में आने से आठ श्रमिक अकाल मौत का शिकार हो गए थे, जबकि 46 को सुरक्षित निकाल लिया गया था। दो दिनों तक सेना अस्पताल ज्योतिर्मठ में उपचार के बाद अब श्रमिक अपने घरों को लौट गए हैं।
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Chamoli Avalanche - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

माणा हिमस्खलन के बवंडर से बच निकले तमाम श्रमवीरों के हौंसले बुलंद हैं। उन्होंने दोबारा सड़क निर्माण में जुटने की बात कही है। वहीं हिमस्खलन से मौत का मंजर देख कुछ श्रमिक इतना सहम गए हैं कि फिर इस क्षेत्र में आना नहीं चाहते हैं।

28 फरवरी को माणा कैंप के समीप हुए हिमस्खलन की चपेट में आने से आठ श्रमिक अकाल मौत का शिकार हो गए थे, जबकि 46 को सुरक्षित निकाल लिया गया था। दो दिनों तक सेना अस्पताल ज्योतिर्मठ में उपचार के बाद अब श्रमिक अपने घरों को लौट गए हैं। अधिकांश श्रमिकों ने दोबारा सड़क निर्माण के लिए बदरीनाथ की भूमि पर लौटने की बात कही है।

बिहार के जितेश कुमार का कहना है कि इस घटना से डरे नहीं हैं। घर जाने के बाद दोबारा माणा पास सड़क निर्माण कार्य में जुटेंगे। वे दो सालों से यहां काम कर रहे हैं। बदरीनाथ की भूमि में काम करने का मौका मिल रहा है, इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है।

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Chamoli Avalanche - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

बिहार के ही किशन कुमार का कहना है कि इस घटना से घरवाले भी परेशान हैं। अभी घरवालों के पास जा रहे हैं, लेकिन फिर लौटेंगे। हमें कोई परेशानी नहीं है। परेशानी होती तो इस हिमालयी क्षेत्र में काम करने क्यों आते। हमें यहां काम करने का मेहनताना भी निचले क्षेत्रों की अपेक्षा अधिक मिलता है।

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Chamoli Avalanche - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

नेपाल के सिंगा बहादुर ने बताया कि तीन माह से माणा पास क्षेत्र में काम कर रहे थे। हिमस्खलन होने पर बर्फ में छलांग मारकर बच निकले। अब दोबारा वहां जाने में असमर्थ हूं। निचले क्षेत्रों में ही मजदूरी करूंगा।

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Chamoli Avalanche - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

यूपी के राम सुजान सड़क निर्माण की कंपनी में फोरमैन के पद पर तैनात थे। वे इसी साल यहां पहुंचे थे। उनका कहना है कि माणा क्षेत्र संवेदनशील है। यहां सामान्य दिनों में भी दोपहर बाद काम करना मुश्किलों भरा रहता है। हिमस्खलन की घटना दिल दहला देने वाली है। अब दोबारा माणा पास क्षेत्र में काम करने की इच्छा नहीं है। मैदानी क्षेत्रों में ही काम करेंगे।

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Chamoli Avalanche - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

उच्च हिमालय क्षेत्रों में रहने पर रक्तचाप बढ़ जाता है और निचले क्षेत्रों में आने पर सामान्य हो जाता है। हिमस्खलन की घटना से बचकर निकले श्रमिकों का पहले दिन रक्तचाप बढ़ा था, लेकिन उपचार के बाद अब उनका स्वास्थ्य सामान्य है। किसी को कोई शारीरिक परेशानी नहीं है। - डॉ. अंकित कुमार मिश्रा, चिकित्सक, सेना अस्पताल, ज्योतिर्मठ, चमोली

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चमोली में हिमस्खलन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

बिहार के मुन्ना प्रसाद ने कहा कि अब वे स्वस्थ हैं। हिमस्खलन के दौरान कंटेनर में ही मौजूद थे। पिछले साल भी क्षेत्र में हिमस्खलन हुआ था। तब भी उनके कंटेनर खिसक गए थे। वो हिमस्खलन कम मात्रा में हुआ, जिससे कोई खतरा नहीं हुआ। तब आठ कंटेनरों को दूसरे स्थान पर शिफ्ट कर दिया था। इस बार बड़ा हिमस्खलन हुआ है। वे कहते हैं कि दो सालों से माणा पास सड़क निर्माण कार्य में जुटे हैं। घर जाने के बाद दोबारा काम पर लौटेंगे।

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