भारतीय शास्त्रों में वर्ष में दो बार नवरात्र मनाने की परंपरा है। इसमें से वसंतीय नवरात्र (चैत्र नवरात्र) नवजीवन व नए बीजों के अंकुरण का प्रतीक है। जो औषधियां वसंत ऋतु में अंकुरित होती हैं। वे शरद में परिपूर्ण होकर मानव कल्याण के काम आती हैं। इसलिए दोनों ऋतुओं में मनाया जाने वाले नवरात्र का अपना अपना महत्व है।