छह अप्रैल से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन अभिजीत मुहूर्त में सुबह 6:09 बजे से लेकर 10:19 बजे के बीच घट स्थापना करना शुभ होगा। ज्योतिषाचार्य शास्त्री संदीप कोटनाला ने बताया कि कुछ चीजों को पूजा में शामिल न करने से पूजा संम्पन्न नहीं होती है। आइए जानते हैं इनके बारे में...
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उन्होंने बताया कि कलश स्थापना के लिए मिट्टी का कलश लें। जौ, साफ मिट्टी, लौंग, इलाइची, रक्षा सूत्र, नारियल, फूल, फल, रोली, कपूर, आम और पान के पत्ते, साबुत सुपारी, अक्षत शामिल करें और ढक्कन में भरने के लिए चावल लें।
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माता के श्रंगार में लाल चुनरी, लाल चूड़ियां, सिंदूर, मेहंदी, कुमकुम, बिंदी, आलता, शीशा, कंघी शामिल करें।
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प्रसाद में मेवा, फल, मिठाई, इलायची, लौंग, मिस्री और मखाना शामिल करें।
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नौ दिन अखंड ज्योति जला रहे तो पीतल का बड़ा दीपक लें। शुद्ध घी से दीपक जलाएं।
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हवन में लौंग के 9 जोड़े, पंच मेवा, सुपारी, कपूर, गुग्गुल, लोबान, घी, चावल, आम की लकड़ी आदि शामिल करें।
कन्या पूजन के दौरान कन्याओं को भोजन खिलाएं और वस्त्र, प्लेट, दक्षिणा आदि दें। (अमर उजाला अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देता। रिडर्स की रुचि को ध्यान में रखकर यह खबर पेश की गई है।)