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Bipin Rawat: बदरीनाथ में दर्शनों के बाद चीन सीमा पर सैनिकों को दीवाली की बधाईयां देने पहुंचे थे जनरल बिपिन रावत, तस्वीरें

Wed, 08 Dec 2021 09:00 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal प्रमोद सेमवाल, संवाद न्यूज एजेंसी, गोपेश्वर
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Army Chief General Bipin Rawat - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2019 में सेना प्रमुख रहते जनरल बिपिन रावत दो बार चमोली जनपद के दौरे पर पहुंचे थे। वे पत्नी संग बदरीनाथ धाम के दर्शनों के बाद दीपावली के दौरान उत्तराखंड से लगे चीन सीमा क्षेत्र में सरहदी गांवों के ग्रामीणों, सेना व आईटीबीपी के जवानों से मिलने पहुंचे थे।

उन्होंने कहा था कि उत्तराखंड से लगी चीन सीमाएं पूरी तरह से महफूज हैं। जनरल बिपिन रावत 19 सितंबर 2019 को पत्नी संग बदरीनाथ धाम के दर्शनों को पहुंचे थे। उन्होंने करीब पंद्रह मिनट तक बदरीनाथ के सभा मंडप से राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्र कल्याण के लिए भगवान बदरीनाथ की संकल्प पूजा की थी। साथ ही बदरीनाथ मंदिर परिसर में माता लक्ष्मी, घंटाकर्ण भगवान और हनुमान मंदिर के दर्शन भी किए थे।

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मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने उन्हें भगवान बदरीनाथ के अंगवस्त्र, प्रतीक चिन्ह और बदरीनाथ के प्रसाद के रुप में चौलाई के लड्डू व तुलसी की माला भेंट की थी। जनरल बिपिन रावत ने अपने पुश्तैनी बही खाते में अपना और अपने परिवार का नाम भी दर्ज कराया था।
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Army Chief General Bipin Rawat - फोटो : अमर उजाला
उनके पंडित पंकज डिमरी ने उन्हें वर्ष 2021 में बदरीनाथ धाम में आयोजित होने वाले विशाल भागवत कथा में प्रतिभाग करने का न्योता भी दिया था, जिसे उन्होंने स्वीकार किया था। हालांकि कोरोना संक्रमण के चलते यह धार्मिक आयोजन न होने से जनरल बिपिन रावत का बदरीनाथ धाम का कार्यक्रम भी नहीं बन पाया था।
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bipin rawat - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद 2019 में ही 24 अक्तूबर को वे चमोली जिले से लगे चीन सीमा क्षेत्र मलारी पहुंचे थे। उनका यह दौरा सीमा क्षेत्र से जुड़े गांवों से पलायन को रोकने के लिए फलदार पौधों का रोपण कर बागवानी के जरिए ग्रामीणों की आजीविका को बढ़ाने को लेकर था।

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bipin rawat - फोटो : अमर उजाला
इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों, सेना व आईटीबीपी के जवानों के साथ अखरोट और चिलगोजा प्रजाति के फलदार पौधों का रोपण किया था। उन्होंने कहा था कि उत्तराखंड से लगी भारत-चीन सीमाएं पूरी तरह से महफूज हैं। सरहदी गांवों में निवास कर रहे ग्रामीणों को सीमा को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए। उन्होंने सैन्य अधिकारियों और सैनिकों को दीपावली की बधाईयां भी दी थीं।
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bipin rawat - फोटो : अमर उजाला
देश के प्रथम सीडीएस जनरल बिपिन रावत पौड़ी गढ़वाल जिले के द्वारीखाल ब्लॉक के ग्राम पंचायत बिरमोली के उपग्राम सैंण के निवासी थे। देश के पहले सीडीएस बनने पर एक जनवरी, 2020 को जनरल बिपिन रावत के पैतृक गांव में तब जमकर जश्न मनाया गया था। बुधवार को उनके हेलीकाप्टर क्रेश होने की खबर से पूरे क्षेत्र में लोग चिंता और दुखी नजर आए और शाम की उनकी मौत की पुष्टि होने के बाद परिजनों व गांव वालों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
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bipin rawat - फोटो : अमर उजाला
सैंण गांव में जनरल बिपिन रावत के चाचा भरत सिंह रावत का परिवार रहता है। बाकी लोग गांव से पलायन कर चुके हैं। भरत सिंह रावत ने बताया कि एक जनवरी, 2020 को पूरे गांव के लोगों ने उनके सीडीएस बनने पर जश्न मनाया था। सुबह से लेकर देर रात तक परिजन और ग्रामीण ढोल नगाड़ों की थाप पर जमकर थिरकते रहे। लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी बांटी थी।
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भरत सिंह बताते हैं कि सैंण गांव ही नहीं पूरे इलाके के लोग गांव के बेटे के देश के सबसे बड़े सैन्य ओहदे पर पहुंचने अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहे थे। तब उस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोटद्वार, ऋषिकेश, देहरादून से भी लोग गांव पहुंचे थे, लेकिन बुधवार की खबर से पूरा इलाका सदमें में है। बुधवार को सैंण गांव में उनकी चाची सुशीला देवी और चचेरा भाई रवींद्र और देवेंद्र भी मौजूद थे। उन्हें सीडीएस बिपिन रावत के निधन की जानकारी मिली तो वे दुखी हो गए। 
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