कार हादसे में घायल दोनों बच्चे तेज दर्द से छाई बेहोशी में भी अपने दादा को याद करते रहे। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान वंश और शानू बार-बार अपने दादा को पुकार रहे थे। बच्चों के बार-बार ‘दादा कहां हो, दादा आ जाओ’ दोहराने से वहां मौजूद अन्य लोगों की आंखें भी भर आई। शुक्रवार सुबह सुरेंद्र सिंह भंडारी अपने दोनों पोतों वंश और शानू के साथ मूल गांव थपलगांव जाने के लिए तैयार हुए। तब दोनों बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं था। दादा ने बच्चों के लिए चिप्स, कुरकुरे, बिस्कुट, नमकीन घर से ही रख दी थी।