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कोटद्वार बस हादसा: सामने आई चौंकाने वाली बातें, ऐसा होता तो बच जाती तीन जिंदगियां, तस्वीरें...

Thu, 11 Jul 2019 10:06 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटद्वार
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उत्तराखंड में हादसा - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के कोटद्वार में मंगलवार को रीठाखाल के पास दुर्घटनाग्रस्त हुई बस में तीन लोगों की मौत और 21 लोगों के घायल होने से क्षेत्र में दुख और शोक का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि सवारियां जागरूक रहती तो हादसा टल सकता था।
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उत्तराखंड में हादसा - फोटो : अमर उजाला
करीब एक महीने पहले सतपुली थाना पुलिस ने शराब पीकर वाहन चलाने के मामले में इसी बस को सीज किया था। तब बस चालक कोई और था, लेकिन परिचालक मुकेश लखेड़ा ही था। 
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उत्तराखंड में हादसा - फोटो : अमर उजाला
घायलों ने पुलिस, प्रशासन और पत्रकारों को बताया कि संगलाकोटी में चालक और परिचालक ने एक होटल में शराब पी थी। घटनास्थल से करीब चार किमी पहले एक सवारी ने जब चालक के शराब पीकर वाहन चलाने पर आपत्ति जताई तो चालक और परिचालक ने उसके साथ अभद्रता कर उसे रास्ते में ही उतार दिया। हादसे से ठीक पहले चालक और परिचालक में काफी गाली गलौच हुई। 

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उत्तराखंड में हादसा - फोटो : अमर उजाला
बस हादसे में घायल ओमप्रकाश समेत अन्य कई यात्रियों ने बताया कि वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले बस को चालक के नियंत्रण से बाहर होते देख उनके दिमाग में बस में लिखे परिवहन अधिकारी के नंबर पर कॉल करने का विचार आया था, लेकिन देखते ही देखते पलभर में ही बस खाई में जा गिरी। 
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उत्तराखंड में हादसा - फोटो : अमर उजाला
रीठाखाल में हुए बस हादसे के बाद गुस्साए लोगों ने परिचालक की मौके पर जमकर धुनाई की। लोगों में पुलिस, प्रशासन और परिवहन विभाग के प्रति भी गुस्सा देखा गया। लोगों का कहना था कि मुख्य मार्गों पर तो पुलिस और परिवहन विभाग सक्रिय रहकर वाहनों की चेकिंग और चालानी कार्रवाई करता है, लेकिन जिले के दूरस्थ पर्वतीय ग्रामीण संपर्क मार्गों का कोई पूछने वाला नहीं है। 
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उत्तराखंड में हादसा - फोटो : अमर उजाला
नतीजा रीठाखाल जैसे बस हादसों के रुप में सामने आ रहा है। निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। रीठाखाल जैसे हादसे कोई नई बात नहीं है, इससे पूर्व भी दर्जनों हादसे हो चुके हैं, लेकिन उनसे कोई सबक नहीं लिया जाता। जिला पंचायत के उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला कहते हैं कि हादसों के तत्काल कुछ दिन बाद सतर्कता बरती जाती है, इसके बाद फिर से सरकारी मशीनरी पुराने ढर्रे पर लौट आती है।  
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