उत्तराखंड में हादसा
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नतीजा रीठाखाल जैसे बस हादसों के रुप में सामने आ रहा है। निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। रीठाखाल जैसे हादसे कोई नई बात नहीं है, इससे पूर्व भी दर्जनों हादसे हो चुके हैं, लेकिन उनसे कोई सबक नहीं लिया जाता। जिला पंचायत के उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला कहते हैं कि हादसों के तत्काल कुछ दिन बाद सतर्कता बरती जाती है, इसके बाद फिर से सरकारी मशीनरी पुराने ढर्रे पर लौट आती है।