पलायन रोकने को एक शख्स ने ऐसी मुहिम चलाई कि खंडहरों में भी जान आ गई। इस मुहिम के रंग को आप तस्वीरों में देखकर वाह कहने से नहीं रोक पाएंगे...
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यह गांव है उत्तराखंड के चंबा ब्लॉक का सौड़ गांव। यहां पलायन की ऐसी मार पड़ी की जिन घरों में कभी जीवन बसता था वह घर आज वीरान हो गए हैं।
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जी हां, यह मुहिम चलाई है गांव के ही एक युवक दीपक रमोला ने। खंडहर बन चुके गांव की दीवारों को रंगकर उस पर उत्तराखंड की संस्कृति को उकेकर दीपक ने मिसाल कायम की। साथ ही वहां गांव की पुरानी यांदे भी दीवारों पर रंग दी।
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यहां 70 परिवारों के गांव में अब सिर्फ 12 ही परिवार रह रहे हैं। इसलिए इस मुहिम का मकसद केवल पलायन को रोकना ही नहीं बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देना है।
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दीपक की इस मुहिम में अब वे अकेले नहीं है। बल्कि अब तक 80 कलाकार गांव की खंडहर दीवारों को संवार चुके हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दीपक का कहना है कि करीब 300 भीति चित्रकार ने यहां आने के लिए आवेदन किया।
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यह काम इसी साल एक जून से शुरू किया था, जो 30 जून तक पूरा होगा। करीब पचास घरों की दीवार पर सुंदर चित्रकारी हो चुकी है।हमारा उद्देश्य पलायन को रोकना है। अब इन खंडहर घरों को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आने लगे हैं।
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उनका कहना है कि घरों की दीवार पर चित्रों के माध्यम से कभी यहां रहे लोगों की जीवन शैली के साथ ही गांव का इतिहास भी दर्शाया जा रहा है। जिस घर में सबसे पहले रेडियो आया था वहां रेडियो का चित्र बनाया गया है।
एक दीवार पर पालकी में दूल्हा और डोली पर दुल्हन दिखाई गई। इस घर में दशकों पहले शादी हुई थी। उसी शादी की यह झलकी दर्शाने की कोशिश की गई। गांव में स्कूल जाते बच्चे भी कलाकारों ने चित्रों के माध्यम से दिखाए।