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दिवाली पर इस शहर में आती है 'भूतों की फौज', शर्मनाक लेकिन है सच

Sat, 29 Oct 2016 06:27 PM IST
गौरव मिश्रा/अमर उजाला, देहरादून
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काला जादू - फोटो : AmarUjala
शिक्षितों और वैज्ञानिक सोच वालों का नगर माना जाने वाला देहरादून दीपावली आने की आहट के साथ ही अंधविश्वास व दकियानूसी सोच की गिरफ्त में जकड़ जाता है। दून की कई दुकानों पर इन दिनों भूत-प्रेत, पिशाच, चुड़ैल, डायन की कथित साधना में इस्तेमाल होने वाला सामान हाथों-हाथ बिक रहा है।
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शिमला के टुटू में युवक अंकुश की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के तार तंत्र विद्या से जुड़े हैं। - फोटो : Demo pic
दीपावली की रहस्यमयी कही जाने वाली अमावस्या की रात सब कुछ बदल देने का झांसा देकर तमाम, तांत्रिक, ओझा, बाबा, अघोरी, लोगों को तमाम उल-जुलूल सामानों की फेहरिस्त थमा रहे हैं। सामानों के नाम ऐसे-ऐसे कि सुनकर माथा घूम जाए।
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धड़ल्ले से खरीदी जा रहा काला जादू का सामान - फोटो : AmarUjala
अमर उजाला संवाददाता गौरव मिश्रा ने इन दुकानों की पड़ताल की तो सामने आया कि इन दिनों  जिन्नदाना, भूतदाना, मशानदाना, पंचरत्न, गोलोचन, भूत केसी, अष्ट गंध, सात कुओं का जल, 27 चौक के कंकड़ की जबरदस्त मांग है। हनुमान चौक स्थित पूजा सामग्री के थोक विक्रेता राकेश देवल कहते हैं कि इन सामानों के लिए रोजाना बड़ी संख्या में ग्राहक आ रहे हैं।

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काला जादू का सामान - फोटो : AmarUjala
ग्राहकों में उच्च वर्ग व बेहद शिक्षित लोगों की संख्या बढ़ रही है। विक्रेता देवेंद्र कुमार और महेश प्रसाद ने बताया कि इस समय मांग इतनी अधिक बढ़ गई है कि माल कई गुना मंगाना पड़ रहा है। यह सामान बंगाल, असम, कर्नाटक, कश्मीर, उड़ीसा से आता है।  

जादू-टोने-तंत्र का सामान 
भूतदाना
प्रेतदाना
चुड़ैलदाना
पिशाचदाना
भूतकेश
गूगल
चुड़ैल केशी
कामिया सिंदूर
अष्टगंध
सात नदियों का पानी 
मोर पंखी
काले भूत का इत्र 
27 चौराहों के कंकड़
नौ कुओं का पानी
नौ तरह की लकड़ी 
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black magic - फोटो : AmarUjala
यह बेहद शर्मनाक है, आखिर हम लोगों को क्या हो गया है? शिक्षा के निजीकरण व बाजारवाद की अति ने वैज्ञानिक सोच को कमजोर करने का काम किया है। इसलिए हमारे समाज में नवजागरण आंदोलन व वैज्ञानिक सोच अभियान की आवश्यकता है। 
-शिक्षाविद् व वैज्ञानिक सोच आंदोलन के प्रणेता डॉ. एसके कुलश्रेष्ठ 
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तंत्र मंत्र
जादू-टोने के नाम पर कथित तांत्रिक-बाबा लोगों को डरा व लालच देकर अनाप-शनाप क्रिया कर्म करते हैं। भारतीय तंत्र शास्त्र बेहद गूढ़ व रहस्यमय है। महान संत रामकृष्ण परमहंस भी तंत्र विद्या पर विश्वास करते थे, लेकिन तंत्र की यह धारा बेहद कल्याणमय, पवित्र, शुभ और दिव्य स्तर की होती है। इसमें किसी का अनिष्ट करने की सोच होती ही नहीं। अधिक से अधिक नकारात्मक शक्तियों से खुद का बचाव होता है। हालांकि इसमें रत्ती मात्र भी वित्तीय स्वार्थ, वासना, क्रोध, शत्रु भाव नहीं होता। भारतीय जीवन पद्धति में तंत्र की धारा का महत्व रहा है। शाक्त परंपरा में तंत्र-मंत्र, यंत्र है, लेकिन उसको कथित जादू-टोने से जोड़ना गलत है। 
-नागेंद्र दत्त कश्यपी, परमाध्यक्ष शाक्त परंपरा पीठ, शाकद्वीपीय   
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भूत - फोटो : DEMO Pics
भारतीय धर्म दर्शन में तंत्र शास्त्र का बहुत ऊंचा स्थान है। इसमें नीच कर्म के लिए कोई जगह नहीं है। जो लोग किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए जादू टोना करने हैं वे पापकर्म करते हैं। वह अपना आज और भविष्य दोनों ही खराब कर रहे हैं। ये कथित बाबा व तांत्रिक दुष्ट श्रेणी के लोग हैं। इन पर जरा भी विश्वास नहीं किया जा सकता। ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा। लोगों को भी चाहिए कि वे वैज्ञानिक सोच के बनें। 
-ज्योतिषाचार्य आचार्य डॉ. सुशांत राज 
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टेंशन
इस रुझान के पीछे कई मनोवैज्ञानिक, राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक कारक काम कर रहे हैं। जीवन बहुत तनावयुक्त व दबाब से भरा हो गया है। फिर इस व्यवस्था में आम जन को राहत नहीं मिलती। हमारी व्यवस्था बेहद सड़ी-गली हो गई है। व्यक्ति अकेला होता जा रहा है। इसलिए तमाम उद्देश्यों को लेकर वह इस तरह की बकवास बातों में शामिल हो जाता है। 
-डॉ. मेजर नंदकिशोर वरिष्ठ मनोचिकित्सक
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