anup jalota father
मुंशी के आमंत्रण पर जलोटा ने राजभवन में चदरिया झीनी झीनी रे भजन सुनाया था। बाद में कैपिटोल के प्रेक्षागृह में भी उन्होंने इसकी प्रस्तुति दी। सान्याल के यहां से जाने के बाद पुरुषोत्तम दास के यहां आने का सिलसिला भी थम गया। रावत के मुताबिक सान्याल एक उच्च वर्गीय परिवार से थीं उनके पिता के नाम पर लखनऊ में अमीनाबाद में सान्याल मार्ग भी है। जानकारी के अनुसार, अनूप जलोटा का जन्म भी नैनीताल में ही हुआ था। वे स्वयं 1995 में जून में फ्लैट्स में आयोजित एक कार्यक्रम में भी नैनीताल आये थे और उन्होंने यहां देर रात तक भजन सुना कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया था।