बामन द्वादशी के मौके पर भगवान बदरीनाथ अपनी माता से दिया वचन निभाने माणा गांव स्थित माता मूर्ति मंदिर में गए। इस दौरान बदरीनाथ धाम के कपाट छह घंटे तक बंद रहे। तस्वीरों में जानिए क्या था भगवान बदरीनाथ का वचन...
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मां को दिया वचन निभाने यहां हर साल आते हैं भगवान नारायण
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शुक्रवार को बदरीनाथ धाम में बाल भोग लगने के बाद सुबह साढ़े नौ बजे बदरीश पंचायत से भगवान बदरीनाथ के प्रतिनिधि के रूप में उद्धव की उत्सव डोली ने हजारों भक्तों के साथ माणा गांव स्थित माता मूर्ति मंदिर के लिए प्रस्थान किया।
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माता मूर्ति मंदिर में बदरीनाथ रावल ईश्वरन नंबूदरी ने पूजा-अर्चना की। बदरीनाथ धाम में अपराह्न लगने वाला भोग भी माता मूर्ति मंदिर में लगाया गया। यहां देव डोलियों के अद्भुत मिलन के बाद अपराह्न साढ़े तीन बजे उद्धव जी बदरीनाथ धाम में विराजमान हुए।
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पौराणिक मान्यता है कि बदरीकाश्रम क्षेत्र में भगवान नर और नारायण तपस्या करने आए थे। अपने पुत्रों के साथ पिता धर्म और माता मूर्ति भी बदरीकाश्रम क्षेत्र में पहुंच गए थे।
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पिछले सप्ताह जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र गए थे तो भी शिक्षामित्रों के एक समूह ने उनसे मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री ने उनसे संयम बनाए रखने का अनुरोध किया था।
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तब बदरीनाथ धाम में भीम पुल से बसुधारा तक धर्म क्षेत्र माना गया और नारायण पर्वत की तलहटी माणा में माता मूर्ति विराजमान हुईं। भगवान बदरीनाथ ने तब माता को एक वचन दिया था।
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भगवान बदरीनाथ ने अपनी माता को वचन दिया था कि वे प्रत्येक वर्ष बामन द्वादशी को उनसे मिलने पहुंचेंगे। आज भी भगवान बदरीनाथ माता से मिलने माता मूर्ति मंदिर जाते हैं।
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इस दौरान करीब छह घंटे तक बदरीनाथ के कपाट बंद रहते हैं। आज भी इस पौराणिक मान्यता का बदरीनाथ धाम में निर्वहन होता आ रहा है। बदरीनाथ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। यहां भगवान विष्णु की मूर्ति विराजमान है।