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करवाचौथ 2018: इस समय तक रहेगा भद्रा का साया, सुहागिनें शुभ मुहूर्त में ही करें चंद्र दर्शन, वरना...

Fri, 26 Oct 2018 07:59 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लक्सर
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karva - फोटो : अमर उजाला
करवाचौथ पर सुहागिनें पति की लंबी उम्र के लिए दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं। रखकर शाम के समय प्रदोष काल और मध्यरात्रि के दौरान भगवान शिव व माता पार्वती, भगवान गणेश, कुमार कार्तिकेय आदि देवताओं का पूजन करती हैं। इस दिन चंद्रमा का पूजन, दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही महिलाएं अपने पति के हाथों से जल ग्रहण करके अपना व्रत खोलती हैं, लेकिन इस बार भद्रा का साया इस समय तक रहेगा।
 
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moon - फोटो : moon
करवाचौथ के दिन रात 7.38 बजे चंद्रोदय होगा, लेकिन भद्रा 7.58 बजे तक रहेगी। हालांकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रात 9 बजे तक रहेगा, ऐसे में रात 8 बजे से 9 बजे के बीच पूजन करना उत्तम और कल्याणकारी होगा। इस दिन चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि में होने के कारण कन्या, मिथुन, मकर, कुंभ, वृष औरतुला राशि की महिलाओं को पूजा का विशेष लाभ होगा।  
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karva
सुहागिन महिलाओं के अखंड सौभाग्य के पर्व करवाचौथ पर सालों बाद तीन अद्भुत संयोग बन रहे हैं। इस दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी होने के कारण यह पर्व महिलाओं के लिए और भी शुभ हो गया है। इसके अलावा करीब 11 साल बाद करवाचौथ के दिन ग्रहों के ऐसे संयोग बन रहे हैं, जो राजयोग, सर्वार्थ सिद्धि और अमृत योग लेकर आ रहे हैं। इन तीन बड़े शुभ योगों की वजह से व्रत और पूजा के लिए करवाचौथ का दिन और खास हो जाएगा।

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karva chauth - फोटो : rajeev gupta amarujala dehradun
ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप भारद्वाज शास्त्री व पंडित राजेश शर्मा का कहना है कि मान्यता है कि इस अद्भुत महा संयोग के दौरान किया गया हर कार्य सफल होता है। इस दौरान की गई पूजा, व्रत का लाभ भी कई गुना अधिक हो जाता है। करवाचौथ वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लें।
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kheer
इसके बाद मंत्र का उच्चारण करते हुए व्रत का संकल्प लें। दिन भर निर्जला व्रत रखें। दीवार पर गेरू से फलक बनाएं और भीगे चावलों को पीसकर घोल तैयार कर लें। इस घोल से फलक पर करवा का चित्र बनाएं। इसके बाद आठ पूरियों की अठावरी बनाएं। मीठे में हलवा या खीर बनाएं और पकवान भी तैयार करें।
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lord shiva and parvati
अब पीली मिट्टी और गोबर की मदद से माता पार्वती की प्रतिमा बनाएं। इस प्रतिमा को लकड़ी के आसान पर बैठाकर मेहंदी, महावर, सिंदूर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी और बिछुआ अर्पित करें। जल से भर हुआ लोटा रखे। करवा में गेहूं और एक छोटे बर्तन में शक्कर भर दें। रोली से करवा पर स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। 
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