उत्तराखंड में भिक्षावृत्ति पर रोक का आदेश कितना कारगर होगा, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन वक्त के साथ भीख मांगने का ट्रेंड भी बदला है। आगे जानिए कहां भीख मांगते हैं ये भिखारी...
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begging ban in uttarakhand
बच्चों ने खासतौर से भीख मांगने को शहर की लाल बत्ती को फोकस कर रखा है। कार की सफाई करने के बाद बच्चे हाथ फैलाते है। शहर क्षेत्र में भीख मांगने वालों में बच्चों और महिलाओं की संख्या ज्यादा है। भीख मांगने के पीछे महिलाएं वाजिब कारण बताने में पीछे नहीं है।
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शहर क्षेत्र में भीख मांगने वालों की संख्या सैकड़ों की संख्या में है। एसएसपी केवल खुराना के कार्यकाल में पहले भी भीख मांगने वाले बच्चों को पकड़कर पुर्नवास केन्द्र भेजा गया। कुछ दिन तो भिखारी सड़कों से गायब हो गए थे, मगर कुछ दिन बाद सक्रिय हो गए।
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खासतौर से पांच से आठ बरस की उम्र के बच्चों को भीख मांगने को सड़कों पर उतारा गया है। काफी बच्चों की मां भी साथ में घूमती है। शहर में प्रिंस चौक, दर्शन लाल चौक, तहसील चौक, दिलाराम चौक, दून अस्पताल, एस्ले हाल चौक के आसपास सबसे ज्यादा नजर आते है। बच्चे लाल बत्ती होते ही रुकने वाली कारों की सफाई में जुट जाते है। थोड़ी बहुत सफाई करने के बाद वह ड्राईवर खिड़की पहुंचकर हाथ फैलाते है।
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शनिवार को प्रिंस चौक पर तो मासूम ने कार की सफाई की तो चालक ने पांच रुपये दिए। मासूम ने चप्पल दिलाने की बात कहते रुपये नहीं लिए। चालक शीशा ऊपर तक तेजी से निकल गया। कई वाहन चालकों ने मासूम ने यहीं गुहार लगाई, मगर हर किसी ने उसकी बात को अनसुना कर दिया। इसके बाद बालक हाथ में कपड़ा लहराते हुए आगे निकल गया।
तहसील चौक पर भी कई बच्चों में कार की सफाई करने की होड़ नजर आई। प्रदेश में भिक्षावृत्ति पर रोक लगने संबंधी आदेश के मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निवेदिता कुकरेती का कहना है कि मीडिया के माध्यम से यह बात संज्ञान में आई है। लिखित में आदेश प्राप्त होने के बाद कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।