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हरिद्वार अर्द्घकुंभ में इन 10 सस्ती जगहों पर भी घूम सकते हैं आप

Sun, 17 Jan 2016 09:09 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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दक्ष महादेव मंदिर एक पुराना मंदिर है जो भगवान् शिव को समर्पित है। यह हरिद्वार से लगभग 4 किमी दूर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1810 में पहले रानी धनकौर ने करवाया था और 1962 में इसका पुनर्निर्माण किया गया।पौराणिक कथाओं के अनुसार इस स्थान पर दक्ष यज्ञ किया गया था। यह यज्ञ देवी सती के पिता दक्ष प्रजापति द्वारा आयोजित किया गया था। उन्होंने इस यज्ञ में अपने दामाद भगवान् शिव को छोड़कर सभी को आमंत्रित किया। अपने पिता के ऐसे व्यवहार के कारण सती ने स्वयं को बहुत अपमानित महसूस किया एवं यज्ञ की पवित्र अग्नि में अपने जीवन का बलिदान दे दिया।
इस मंदिर में एक छोटा गड्ढा है और ऐसा माना जाता है कि यह वही स्थान है जहाँ देवी सती ने अपने जीवन का बलिदान दिया था। मंदिर के मध्य में भगवान् शिव की मूर्ती लैंगिक रूप में रखी गई है। प्रत्येक वर्ष हिंदू महीने सावन में भक्त बड़ी संख्या में यहाँ प्रार्थना करने आते हैं।
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भारत माता मंदिर, जो मदर इंडिया मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है, हरिद्वार में एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर भारत माता को समर्पित है एवं इसका निर्माण प्रसिद्ध धार्मिक गुरु स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी द्वारा करवाया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने वर्ष 1983 में इस मंदिर का उद्घाटन किया था। इस मंदिर में आठ मंजिलें हैं एवं यह 180 फुट की उंचाई पर स्थित है। इस पवित्र स्थल की प्रत्येक मंजिल विभिन्न देवी देवताओं एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को समर्पित है।
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चंडी देवी मंदिर उत्तराखण्ड की पवित्र धार्मिक नगरी हरिद्वार में नील पर्वत के शिखर पर स्थित है। यह गंगा नदी के दूसरी ओर अवस्थित है। यह देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। चंडी देवी मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है। किवदंतियों के अनुसार चंडी देवी ने शुंभ-निशुंभ के सेनापति 'चंद' और 'मुंड' को यहीं मारा था। जबकि एक अन्य लोककथा के अनुसार नील पर्वत वह स्थान है, जहाँ हिन्दू देवी चंडिका ने शुंभ और निशुंभ राक्षसों को मारने के बाद कुछ समय आराम किया था।

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भारत के उत्तरांचल राज्य के रुड़की शहर में पिरान कलियर उर्स का आयोजन होता है। मेले का आयोजन रूडकी के समीप ऊपरी गंग नहर के किनारे जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पिरान कलियर गांव में होता है। इस स्थान पर हजरत मखदूम अलाउदीन अहमद ‘‘साबरी‘‘ की दरगाह है। यह स्थान हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच एकता का सूत्र है। यहां पर हिन्दु व मुसलमान मन्नते मांगते है व चादरे चढाते हैं। मेले स्थल पर दरगाह कमेटी द्वारा देश/विदेश से आने वाले जायरिनों/श्रद्वालुओं के लिये आवास की उचित व्यवस्था है। दरगाह के बाहर खाने पीने की अच्छी व्यवस्था उपलब्ध है।
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उत्तरांचल में हिमालय पर्वतों के तल में बसा ऋषिकेश में नीलकंठ महादेव मंदिर प्रमुख पर्यटन स्थल है। नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश के सबसे पूज्य मंदिरों में से एक है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने इसी स्थान पर समुद्र मंथन से निकला विष ग्रहण किया गया था। उसी समय उनकी पत्नी, पार्वती ने उनका गला दबाया जिससे कि विष उनके पेट तक नहीं पहुंचे। इस तरह, विष उनके गले में बना रहा। विषपान के बाद विष के प्रभाव से उनका गला नीला पड़ गया था। गला नीला पड़ने के कारण ही उन्हें नीलकंठ नाम से जाना गया था। अत्यन्त प्रभावशाली यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर परिसर में पानी का एक झरना है जहाँ भक्तगण मंदिर के दर्शन करने से पहले स्नान करते हैं।
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पतंजलि योगपीठ भारत का सबसे बड़ा योग शिक्षा संस्थान है। इसकी स्थापना स्वामी रामदेव द्वारा योग का अधिकाधिक प्रचार करने एवं इसे सर्वसुलभ बनाने के उद्देश्य से की गयी थी। यह हरिद्वार में स्थित है। आचार्य बालकृष्ण इसके महासचिव हैं। पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड, हरिद्वार के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित अत्याधुनिक संयन्त्रो से युक्त औद्योगिक इकाई है। इस औद्योगिक इकाई को शुद्ध, गुणवत्तायुक्त एवं वैज्ञानिक रुप से विकसित खनिज एवं वनस्पतिक उत्पादों के निर्माण हेतु स्थापित किया गया है।
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मनसा देवी को भगवान शिव की मानस पुत्री के रूप में पूजा जाता है। इनका प्रादुर्भाव मस्तक से हुआ है इस कारण इनका नाम मनसा पड़ा। इनके पति जगत्कारु तथा पुत्र आस्तिक जी हैं। इन्हें नागराज वासुकी की बहन के रूप में पूजा जाता है, प्रसिद्ध मंदिर एक शक्तिपीठ पर हरिद्वार में स्थापित है। इन्हें शिव की मानस पुत्री माना जाता है परंतु कई पुरातन धार्मिक ग्रंथों में इनका जन्म कश्यप के मस्तक से हुआ हैं, ऐसा भी बताया गया है। कुछ ग्रंथों में लिखा है कि वासुकि नाग द्वारा बहन की इच्छा करने पर शिव नें उन्हें इसी कन्या का भेंट दिया और वासुकि इस कन्या के तेज को न सह सका और नागलोक में जाकर पोषण के लिये तपस्वी हलाहल को दे दिया। इसी मनसा नामक कन्या की रक्षा के लिये हलाहल नें प्राण त्यागा।

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उत्तराखंड स्थित राजाजी नेशनल पार्क 830 किमी. के दायरे में फैला हुआ है। यह ‌उत्तराखंड के हरिद्वार, देहरादून और पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र में पड़ता है। 1983 में तीन वाइल्ड लाइफ सेंचुरी ‌चीला, मोतीचूर और राजाजी को आपस में मिला दिया गया ‌था।
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पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं माता भगवती देवी शर्मा द्वारा शांतिकुंज आश्रम की स्थापना 1971 में की गई थी। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज, हरिद्वार-ऋषिकेश मार्ग पर रेलवे स्टेशन से छह किलोमीटर दूरी पर स्थित है, जो युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं. श्रीराम शर्मा आचार्य (1911-1990) एवं माता भगवती देवी शर्मा (1926-1994) की प्रचंड तप साधना की ऊर्जा से भरा हुआ है। यह जागृत तीर्थ लाखों-करोड़ों गायत्री साधकों का गुरुद्वारा है।
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