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रक्षा बंधन पर यहां राखी नहीं बांधते, बल्कि खेला जाता है 'खूनी खेल', पढ़िए रोचक कहानी

Mon, 07 Aug 2017 10:07 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
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रक्षा बंधन को जहां लोग भाई बहन के प्यार का त्योहार मानते हैं, वहीं एक जगह ऐसी भी है जहां इस द‌िन बहने भाई की कलाई पर राखी नहीं बांधती हैं, बल्क‌ि पूरा गांव म‌िलकर खुशी-खुशी खूनी खेल खेलने जुट जाते हैं। जानते हैं इसकी रोचक कहानी...
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उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में मां वाराही धाम में श्रावणी पूर्णिमा (रक्षाबंधन के दिन) को यहां के स्थानीय लोग चार दलों में विभाजित होकर पत्थरों से युद्घ करते हैं।
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इन चार दलों को खाम कहा जाता है, जिनमें क्रमशः चम्याल खाम, बालिक खाम, लमगडिया खाम, और गडहवाल होते हैं। ये चार दल दो समूहों में बंट जाते हैं और इसके बाद युद्ध होता है जिसमें पत्थरों को अस्त्र के रूप में उपयोग किया जाता है। 

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इस पत्थरमार युद्ध को स्थानीय भाषा में ‘बग्वाल’ कहा जाता है। यह बग्वाल कुमाऊं की संस्कृति का अभिन्न अंग है। श्रावण मास में पूरे पखवाड़े तक देवीधुरा में मेला लगता है।
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​जहां सबके लिये यह दिन रक्षाबंधन का दिन होता है वहीं देवीधुरा के लिये यह दिन पत्थर-युद्ध अर्थात 'बग्वाल का दिवस' होता है। इस पाषाण युद्ध है जिसको देखने देश के कोने-कोने से दर्शनार्थी आते हैं। इस पाषाण युद्ध में चार खानों के दो दल एक दूसरे के ऊपर पत्थर बरसाते हैं।
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इस युद्घ में कई लोग घायल भी होते हैं। बग्वाल खेलने वाले अपने साथ बांस के बने फर्रे पत्थरों को रोकने के लिए रखते हैं।  मान्यता है की बग्वाल खेलने वाला व्यक्ति यदि पूर्णरूप से शुद्ध व पवित्रता रखता है तो उसे पत्थरों की चोट नहीं लगती है। 
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बता दें क‌ि इस बार रक्षा बंधन पर चंद्रग्रहण भी लग रहा है। इसल‌िए के वकल शुभ मुहूर्त में ही राखी बांध सकेंगे। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि चंद्रग्रहण से 9 घंटे पहले यानी दोपहर 1.53 बजे से सूतक लग जाएंगे, वहीं सुबह 11.04 बजे तक भद्रा का असर रहेगा। 
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- फोटो : अमर उजाला
इसल‌िए सुबह 11.05 बजे से लेकर 1.52 मिनट (करीब 3 घंटे) तक आप रक्षाबंधन का त्योहार मना सकते हैं।
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