भगवान बदरीनाथ धाम के कपाट मंगलवार को शाम चार बजकर पैंतीस मिनट पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
विज्ञापन
बदरीधाम के कपाट हुए बंद, यहां कीजिए भगवान बदरीश के भव्य दर्शन
2 of 7
कपाट बंद होते समय धाम में करीब साढ़े सात हजार तीर्थयात्रियों ने भगवान बदरीनाथ के दर्शन कर मनौतियां मांगी।
विज्ञापन
बदरीधाम के कपाट हुए बंद, यहां कीजिए भगवान बदरीश के भव्य दर्शन
3 of 7
इस मौके पर गढ़वाल राइफल की बैंड धुनों और जय-जय हो बदरीनाथ के जयघोष से बदरीघाटी गूंज उठी।
बदरीधाम के कपाट हुए बंद, यहां कीजिए भगवान बदरीश के भव्य दर्शन
4 of 7
कपाट बंद होने के साथ ही तीनों देव कुबेर जी, गरुड़ जी, उद्धव जी की उत्सव डोलियां और आदि गुरू शंकराचार्य की डोली पांडुकेश्वर के लिए रवाना हुई। बुधवार को तीनों देव डोलियां शीतकालीन गद्दी स्थल पांडुकेश्वर योग ध्यान बदरी मंदिर में पहुंच जाएंगी।
विज्ञापन
बदरीधाम के कपाट हुए बंद, यहां कीजिए भगवान बदरीश के भव्य दर्शन
5 of 7
बदरीनाथ धाम में मंगलवार को तड़के से ही भगवान बदरीविशाल की महाभिषेक पूजा शुरू हो गई थी, जो दोपहर बाद कपाट बंद होने की प्रक्रिया के साथ संपन्न हुई।
विज्ञापन
बदरीधाम के कपाट हुए बंद, यहां कीजिए भगवान बदरीश के भव्य दर्शन
6 of 7
धार्मिक परंपरा के अनुसार दोपहर दो बजकर 30 मिनट पर बदरीनाथ के मुख्य पुजारी रावल ईश्वरन नंबूदरी ने माता लक्ष्मी का वेश धारण कर लक्ष्मी जी की प्रतिमा को बदरीनाथ गर्भगृह में रखा और माणा गांव की कन्याओं की ओर से निर्मित कंबल पर घी का लेपन कर बदरीविशाल को ओढ़ाया गया।
बदरीधाम के कपाट हुए बंद, यहां कीजिए भगवान बदरीश के भव्य दर्शन
7 of 7
बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के दौरान धाम परिसर में सीमांत गांव माणा और बामणी गांवों के महिला-पुरुषों और तीर्थयात्रियों की ओर से दिनभर चले कीर्तनों से बदरीनाथ धाम गुंजायमान रहा।