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लाखों सरकारी कर्मचारियों को झटका, सरकार का यह फरमान पढ़कर बढ़ जाएगी टेंशन

Wed, 28 Mar 2018 04:31 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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सरकारी कर्मचारियों के लिए सरकार ने एक फरमान जारी किया है, जिसे पढ़कर आपकी टेंशन बढ़ जाएगी।

 
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सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के तहत निर्धारित भत्तों का इंतजार कर रहे प्रदेश सरकार के लाखों कर्मचारियों की मुराद जल्द पूरी नहीं हो पाएगी। उनके भत्तों पर फिलहाल सरकार की खराब माली हालत का ब्रेक है।सरकार की हिचकिचाहट की मुख्य वजह राजस्व खर्च में बढ़ोतरी है।
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वित्त विभाग के आंकलन के अनुसार, सरकार यदि सभी कार्मिकों को नए भत्ते देने का निर्णय लेगी तो इससे राजकोष पर करीब 1800 करोड़ रुपये सालाना अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ेगा। यानी सरकार को हर महीने भत्तों पर 150 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च करने होंगे।

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trivendra singh rawat
सूत्रों की मानें तो वर्तमान में प्रदेश सरकार सभी कर्मचारियों पर वेतन, भत्तों व पेंशन पर करीब 1200 करोड़ रुपये सालाना खर्च कर रही है। यही वजह है कि सरकार भत्ते देने से हिचक रही है। वरना वेतन समिति भत्तों के निर्धारण के संबंध में अपनी रिपोर्ट काफी पहले सौंप चुकी है। कैबिनेट ने इस रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है, जिसने अभी अपनी रिपोर्ट कैबिनेट को प्रस्तुत नहीं की है।
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prakash pant
सरकार ने सातवां वेतन लागू किया, जिससे राजकोष पर 4100 करोड़ रुपये का व्यय भार पड़ा। 130 करोड़ रुपये बोनस पर खर्च किए। एरियर भी करोड़ों की धनराशि व्यय की गई। सरकार की माली हालत के आधार पर भत्तों को देने का निर्णय किया जाएगा। अभी मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट भी आनी है। उस पर सम्यक विचारोपरांत सरकार निर्णय लेगी।
- प्रकाश पंत, वित्त मंत्री
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employee
कर्मचारियों को सातवें वेतन का असल लाभ तभी होगा जब उनके वेतन में संशोधित भत्ते शामिल होंगे। वेतन समिति रिपोर्ट दे चुकी है और अब सरकार इस बारे में निर्णय लेना चाहिए। लाखों कर्मचारी सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। भत्तों का चूंकि एरियर नहीं मिलता है, इसलिए इसे देने में जितनी देरी होगी, कर्मचरियों को उतनी अधिक वित्तीय हानि उठानी पड़ेगी।
- अरुण पांडेय, कार्यकारी महामंत्री, राज्य संयुक्त कर्मचारी परिषद
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