मुद्रा लोन मिल जाएगा, लेकिन... राजधानी के बैंकों में मुद्रा लोन की जानकारी लेने पर सबसे ज्यादा इस सवाल का सामना करना पड़ता है। इस ‘लेकिन’ के पीछे छिपा है बैंकों का मुद्रा लोन न देने का बहाना, लंबी जांच-पड़ताल की प्रक्रिया, आईटीआर, गारंटर, टैक्स बिल, बैलेंस शीट जैसे तमाम पचड़े। जबकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दावा और केंद्र सरकार की प्रचार सामग्री की इबारत के मुताबिक मुद्रा लोन बिना गारंटी के मिलेगा और सबको मिलेगा। अमर उजाला संवाददाता ने शहर के अलग-अलग बैंकों की शाखाओं में मुद्रा लोन के बारे में पड़ताल की तो हकीकत दावों के एकदम विपरीत नजर आई। यकीन मानिये मुद्रा लोन लेना और एवरेस्ट चढ़ना एक जैसा हो गया है। आंकड़ों के हिसाब से गत वित्तीय वर्ष में बैंकों ने मुद्रा लोन देने का मात्र 50 प्रतिशत टारगेट ही पूरा किया। बैंक अधिकारियों का जैसा रवैया है। इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भी तरुण योजना के ऋण वितरण में बैंक काफी पिछड़े हुए हैं।
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- फोटो : amar ujala
एसबीआई, शाखा-पटेलनगर : बैंक आंख बंद कर लोन नहीं दे सकता
यहां हमें शाखा प्रबंधक अभय कुमार दत्ता मिले। सर! मुझे मुद्रा लोन चाहिए, जवाब में प्रबंधक का सवाल उभरा- किस काम के लिए चाहिए? मेरी कारगी चौक पर कंप्यूटर की शॉप है, उसे और बढ़ाना है। प्रबंधक बोले, कारोबार तो शुरू करोगे, लेकिन लोन लेने के बाद बंद करके भाग गए तो उसका क्या इलाज होगा? लोन देने से पहले दुकान देखनी पड़ेगी, दुकान का पांच साल का एग्रीमेंट चाहिए, जीएसटी रजिस्ट्रेशन चाहिए, एनओसी चाहिए, इसके बाद लोन के लिए हेड ऑफिस जाना होगा... प्रबंधक ने लंबी-चौड़ी प्रक्रिया बता डाली। लेकिन, मुद्रा लोन में तो किसी गारंटर और इतनी औपचारिकताओं का प्रावधान नहीं है। अमर उजाला संवाददाता के यह तर्क दिया तो प्रबंधक ने यह कहते हुए साफ इनकार दिया कि बैंक कभी भी आंख बंद कर लोन नहीं दे सकता।
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- फोटो : अमर उजाला
केनरा बैंक : तीन साल का आईटीआर जरूरी
पटेलनगर स्थित केनरा बैंक की शाखा। शाखा प्रबंधक राहुल उनियाल से मिले। हमने कहा सर! मुद्रा लोन लेना है। इस पर प्रबंधक ने सवाल किया, क्या यहां खाता है? हमने कहा, नहीं सर। प्रबंधक का दोबारा सवाल, किसलिए लोन चाहिए तो उन्हें बताया गया कि कंप्यूटर एसेसरीज की दुकान शुरू करनी है। प्रबंधक ने सवाल दागा, दुकान किराये की है या अपनी? फिर खुद ही बोले, पिता जी के नाम है तो 40-50 हजार ही लोन मिल पाएगा... जब हमने कहा कि चार लाख रुपए लोन चाहिए तो प्रबंधक ने कहा कि इसके लिए कम से कम तीन साल का आईटीआर होना चाहिए। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो मुद्रा लोन में दस लाख तक बिना किसी गारंटी के लोन का प्रावधान किया है... हमारे इस तर्क पर बैंक प्रबंधक हंसते हुए बोले... ऐसे बोलने से क्या होता है, किसी भी सूरत में 50 हजार से अधिक का लोन तीन साल का आईटीआर देखे बिना नहीं दे सकते हैं। लोन चाहिए तो पूरा लेखा-जोखा लेकर आना, इसके बाद हम निरीक्षण करेंगे, तब तय करेंगे लोन देना है या नहीं।
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बैंक ऑफ बड़ौदा : मार्केट की वैल्यू के हिसाब से मिलेगा लोन
पटेलनगर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा पहुंचने पर शाखा प्रबंधक सरोज डोबरियाल से मिले। उन्हें पूछा कि क्या मुद्रा लोन मिल सकता है? सरोज ने बताया कि जी मिल सकता है लेकिन पहले पूरी जानकारी देनी होगी। हम मार्केट में जाकर आपकी लोकेशन के हिसाब से दुकान देखेंगे, इसका मूल्यांकन कराने के बाद ही बता पाएंगे कि कितना लोन मिलेगा। जब उनसे कहा गया कि मुद्रा लोन तो सब्जी की ठेली लगाने के लिए भी मिलता है तो वह बोली कि बैंक अपने नियमों का पालन जरूर करेगा।
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पीएनबी : मुद्रा लोन अधिकारी आठ दिन से छुट्टी पर हैं
अमर उजाला की टीम पटेलनगर में ही पंजाब नेशनल बैंक पहुंची। यहां आठ दिन पहले मुख्य प्रबंधक संतोष कुमार से मिले थे। मुद्रा लोन मिल जाएगा क्या? यह पूछने पर उन्होंने जवाब दिया कि आज लोन वाले अधिकारी राजबीर छुट्टी पर हैं, आप एक दो दिन बाद आ जाइए। इसके बाद बुधवार को दोबारा हमारी टीम बैंक पहुंची तो पता चला कि लोन अधिकारी अभी भी छुट्टी पर हैं। मुख्य प्रबंधक बीडी भाटिया भी मौके पर नहीं मिले।
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उत्तराखंड ग्रामीण बैंक
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ग्रामीण बैंक : पुराने लोन के रिकॉर्ड लाओ तो मिलेगा मुद्रा लोन
शिवाजी धर्मशाला के निकट ग्रामीण बैंक की शाखा। सामने प्रबंधक एमपी डंडरियाल मिले। उनसे सवाल किया कि सर! मुद्रा लोन चाहिए। जवाब मिला, आपके पास अगर दुकान के पुराने कागजात, बिल, पुराने लोन के रिकॉर्ड हैं तो उन्हें देखकर लोन दे सकते हैं। हमने सवाल किया, प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना में तो ऐसे प्रावधान नहीं हैं? प्रबधंक ने जवाब दिया-सॉरी हम अपनी कागजी औपचारिकताओं के बिना लोन नहीं दे सकते।
क्या होता है मुद्रा लोन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना शुरू की थी। इसके तहत शिशु, किशोर और तरुण लोन दिया जाता है। पांच हजार रुपये तक के लोन को शिशु, 50,000 से पांच लाख तक के लोन को किशोर और पांच लाख से दस लाख रुपये के लोन को तरुण नाम दिया गया था। खास बात यह है कि दस लाख रुपये तक के इस लोन में किसी भी तरह के गारंटर की जरूरत नहीं होती।