पर्वतारोहियों के शव पहुंचाएं गए घर।
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मौसम की बेरुखी बन रही रेस्क्यू में बाधा
घटना के पांच दिन के बाद भी बरामद शवों को उत्तरकाशी नहीं लाया जा सका है। वहीं तीन पर्वतारोही अभी भी लापता चल रहे हैं। घटना स्थल पर बार-बार बदल रहे मौसम से रेस्क्यू अभियान बाधित हो रहा है। शनिवार को भी मात्र सात शवों को ही लाया जा सका। रेस्क्यू दल मौसम ठीक होने का इंतजार करता रहा। वहीं मातली हेलीपैड पर भी परिजन व प्रशासन घटना स्थल पर मौसम ठीक होने व शवों के पहुंचने का इंतजार करते रहे।
ये शव लाए गए
1-रक्षित के पुत्र कुमार जेएच निवासी बंगलूरू।
2-नरेंद्र सिंह पुत्र अकवीर सिंह निवासी उत्तराखंड।
3-सतीश रावत पुत्र शूरवीर सिंह निवासी टिहरी गढ़वाल।
4-अमित कुमार शॉ पुत्र अर्जुन शॉ निवासी कोलकाता।
5-अतुनु धार पुत्र शशांकाधर निवासी नई दिल्ली।
6-गोहिल अर्जुन सिंह पुत्र गोहिल भूपेंद्र सिंह निवासी गुजरात।
7-अंशुल कैंथला पुत्र इंदर कैंथला निवासी शिमला हिमाचल प्रदेश।
8-विक्रम एम पुत्र मैलेश निवासी कर्नाटका।
9-लांस नायक शुभम सिंह पुत्र देवी प्रसाद निवासी उत्तरप्रदेश।
10-कपिल पंवार पुत्र जगमोहन सिंह निवासी बनगांव उत्तरकाशी।
कब क्या हुआ
4 अक्तूबर को करीब पौने नौ बजे एवलांच की चपेट में आए प्रशिक्षु व प्रशिक्षु पर्वतारोही
4 अक्तूबर को ही फर्स्ट रिस्पांडर ने बरामद किए 4 शव।
6 अक्तूबर को रेस्क्यू दल घटना स्थल पर पहुंचा, 15 शव किए बरामद।
7 अक्तूबर को रेस्क्यू दल ने 7 और शव बरामद किए। घटना के दिन बरामद चार शवों को उत्तरकाशी पहुंचाया गया।
8 अक्तूबर को 7 शवों को एडवांस बेस कैंप से मातली हेलीपैड पहुंचाया गया। वहीं रेस्क्यू दल ने घटना स्थल से एक और शव बरामद किया।
9 अक्तूबर को 10 शव सेना के हेलीकाप्टर से पहुंचे मातली।
( अब तक कुल 21 शव परिजनों को सौंप जा चुके हैं, 6 शव एडवांस बेस कैंप में हैं, 2 अभी भी लापता हैं।)