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इनसे बेहद डरते थे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, खुद कबूली थी ये बात

Sat, 18 Aug 2018 10:30 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई टिहरी
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atal bihari vajpayee, sunder lal bahuguna
दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इनसे बेहद डरते थे। यह बात खुद अटल बिहारी ने दिल्ली में कई लोगों के सामने कबूली थी।
 
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atal bihari vajpayee
उत्तराखंड के टिहरी निवासी अधिवक्ता सुरेश चंद जैन ने अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की खबर सुनकर दुख से भर गए। अधिवक्ता सुरेश चंद अक्सर उनसे मिलने दिल्ली जाते थे, लेकिन अटल बिहारी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी मुलाकातें कम हो गई।
 
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atal bihari vajpayee
एक संस्मरण सुनाते हुए बताया कि एक बार दिल्ली अटल जी के आवास पर पर्यावरविद् सुंदरलाल बहुगुणा को उनसे मिलाया तो उन्होंने कहा था कि बहुगुणा जी से बहुत डर लगता है, वह कई दिनों तक अनशन पर बैठ जाते हैं। 
 

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Sunderlal Bahuguna
पेड़ पौधों को बचाने में सुंदरलाल बहुगुणा की अहम भूमिका है। 1971 में सुन्दरलाल बहुगुणा ने पेड़ों की सुरक्षा में सोलह दिन तक अनशन किया। चिपको आन्दोलन के कारण वृक्षमित्र के नाम से वह पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो गए। पर्यावरण को बचाने के लिए ही 1990 में सुंदर लाल बहुगुणा ने टिहरी बांध का विरोध किया था। वह उस बांध के खिलाफ रहे। उनका कहना था कि 100 मेगावाट से अधिक क्षमता का बांध नहीं बनना चाहिए। चिपको पदयात्रा के तहत एक बार फिर सुंदरलाल बहुगुणा ने जून 1981 में चंबा के लंगेरा गांव से हिमाचल की पदयात्रा शुरू की। 5000 किमलोमीमीटर की यह यात्रा 1983 में विश्वस्तर पर काफी तेजी से उभर कर सामने आई।
 
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atal bihari vajpayee
उस दौर में जनसंघ और भाजपा के प्रमुख कार्यकर्ताओं के अनुसार अटल जी तीन से अधिक बार पहाड़ के दौरे पर आए तो कर्णप्रयाग जरूर रूके। पहाड़ में शिक्षा और विकास की कमी का दर्द अटल जी को रहा। जिसके चलते अटल जी ने यहां एक स्कूल के लिए भूमि पूजन भी रखी। हालांकि आपसी विवादों के चलते स्कूल धरातल पर नहीं उतर पाया। नगर के पुजारी गांव निवासी और वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र पुजारी कहते हैं करीब वर्ष 1983-84 के आस पास अटल विहारी बाजपेयी यहां पहुंचे। इस दौरान यहां उमा देवी की पूजा भी अटल जी ने की। तब अटल जी ने मांग को स्वीकारते हुए यहां स्कूल के लिए भूमि पूजन भी किया था।
 
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atal bihari vajpayee
व्यापारी अनिल अग्रवाल, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता भुवन नौटियाल आदि का कहना है कि सत्तर के दशक में जयप्रकाश नारायण सहित कई वरिष्ठ नेताओं के साथ अटल जी यहां पहुंचे थे। तब लोग अटल के भाषण सुनने के लिए 50-50 किमी पैदल चलकर पहुंचे थे। 88 वर्षीय सरदार संत सिंह कहते हैं कि वर्ष 1985 में भी अटल विहारी बाजपेयी बदरीनाथ आए। तब वापसी में कर्णप्रयाग में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। जनसंघी रहे सरदार संत सिंह ने एक वाक्या सुनाया। सरदार संत ने बताया कि अस्सी के दशक में जब अटल कर्णप्रयाग पहुंचे तो अटल जी की गाड़ी में तेल खत्म हो गया। तब उन्होंने अटल जी की गाड़ी में तेल भरवाया और पैसे दे दिए। तो अटल जी नाराज हुए और डांट लगाई थी। 
 
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atal bihari vajpayee
पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी बाजपेयी वर्ष 1984 में गढ़वाल लोकसभा सीट से हेमवती नंदन बहुगुणा की जीत के बाद लोगों का धन्यवाद देने गोपेश्वर पहुंचे थे। तब उन्होंने यहां के लोगों को देवत्व का दर्जा दिया था। उन्होंने कहा था कि पहाड़ में उद्योग लगें, जिससे यहां का पानी और जवानी बेकार न जाए। वर्ष 1984 में जब वे गोपेश्वर पहुंचे तो चमोली जिला पंचायत परिसर में उन्होंने एक अभूतपूर्व जनसभा को संबोधित किया था। इस दौरान जनता पार्टी के अलावा अन्य दलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी उनके माल्यार्पण के लिए उमड़े थे। बाजपेयी ने जनसभा में पहाड़वासियों को देवत्व का दर्जा दिया था। 
 
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atal bihari vajpayee
बदरीनाथ के विधायक महेंद्र प्रसाद भट्ट का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी बाजपेयी पार्टी संगठन को अपने परिवार की तरह मानते थे। हर एक कार्यकर्ता से एक-एक कर वार्ता करना और अपने सुझाव देते थे। मुझे भी उन्होंने संगठन के कार्यों को आगे बढ़ाने की सीख दी थी। वर्ष 1991 में जब वे ऋषिकेश पहुंचे तो उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) कार्यकर्ता के रुप में मुझ से भी वार्ता की थी। अपने से बड़े नेताओं के सम्मुख बात रखने का हौंसला मुझे अटल जी से ही मिला।
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